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“चीन लिंक्ड अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़: बरेली में डॉक्टर समेत 5 गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला था डिजिटल ठगी का जाल”

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By Roopa
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बरेली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ बरेली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में एक होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल है। यह गिरोह कथित तौर पर चीन स्थित साइबर हैंडलर्स के संपर्क में रहकर देशभर में डिजिटल ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शाकिब अली, राजकुमार, आशीष सिंह, डॉक्टर सचेंद्र कुमार (बीएचएमएस) और बब्लू उर्फ माधोराम शामिल हैं। यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कृष्णा कॉलोनी रोड के पास एक संदिग्ध कार को घेरकर सभी आरोपियों को हिरासत में लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध ढांचे का हिस्सा था, जो एन्क्रिप्टेड व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए संचालित होता था। इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड सुमित बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस के अनुसार सुमित का संपर्क चीन आधारित साइबर ऑपरेटर्स से था, जो गिरोह को तकनीकी उपकरण, APK फाइलें और ठगी के डिजिटल मॉड्यूल उपलब्ध कराते थे।

यह गिरोह फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, मालवेयर युक्त APK फाइलों और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी डराने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगता था। पीड़ितों को झूठे मामलों में फंसाने का भय दिखाकर उनसे तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।

जांच के दौरान पुलिस को मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, डेबिट कार्ड, चेकबुक और बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा बरामद हुआ है। इन डिवाइसों में कई पीड़ितों की बैंकिंग जानकारी और लॉगिन क्रेडेंशियल्स भी मिले हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि डॉक्टर सचेंद्र कुमार इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था। उसने कथित तौर पर “SR Sons and Group Trust” नाम से एक ट्रस्ट बनाया था, जिसके माध्यम से 22 बैंक खातों में ठगी की रकम घुमाई जाती थी। इन खातों के जरिए देश के कई राज्यों में धन की हेराफेरी की गई।

अधिकारियों के अनुसार गिरोह की संरचना बेहद संगठित थी। कुछ आरोपी फर्जी पहचान से बैंक खाते खुलवाते थे, जबकि अन्य लोग ट्रांजेक्शन और नकदी निकासी का काम संभालते थे। पूरी अवैध कमाई को कमीशन के आधार पर बांटा जाता था, जिसमें मुख्य सरगना सुमित सबसे बड़ा हिस्सा रखता था।

पूछताछ में आरोपी शाकिब अली ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने साइबर ठगी के तरीके तिहाड़ जेल में बंद कुछ लोगों से सीखे थे। इसके बाद उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस संगठित नेटवर्क का विस्तार किया।

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पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, मोबाइल, एटीएम कार्ड, पहचान दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है। सभी सामग्री की जांच कर आगे के वित्तीय लिंक खंगाले जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह ने ट्रेडिंग फ्रॉड के जरिए लगभग ₹1.55 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया है। ट्रस्ट आधारित बैंकिंग संरचना का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर लेनदेन को छिपाया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह व्हाट्सएप के एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स के जरिए प्रशिक्षण लेता था और APK फाइलों के माध्यम से पीड़ितों के SMS डेटा व बैंकिंग जानकारी चुराई जाती थी।

इस मामले पर साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे नेटवर्क अब तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार “डिजिटल अरेस्ट और APK आधारित फ्रॉड का कॉम्बिनेशन बेहद खतरनाक है, जिससे कुछ ही मिनटों में लोगों को डराकर ठगी की जा रही है।”

पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय लिंक और भी गहरे हो सकते हैं। फरार मास्टरमाइंड सुमित और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है। कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी मामलों को इस नेटवर्क से जोड़कर जांच की जा रही है।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पुलिस आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों की तैयारी में जुटी है।

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