₹1.6 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में CBI ने पूर्व बैंक मैनेजर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया

₹1.6 करोड़ का ‘डिजिटल अरेस्ट’ जाल: पूर्व बैंक मैनेजर समेत तीन गिरफ्तार, मल्टी-स्टेट साइबर नेटवर्क का खुलासा

Team The420
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नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड के एक बड़े मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने पूर्व बैंक मैनेजर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला करीब ₹1.6 करोड़ की ठगी से जुड़ा है, जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक को फर्जी गिरफ्तारी का डर दिखाकर भारी रकम ट्रांसफर करवाई गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के तार एक सुनियोजित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जो अलग-अलग राज्यों में फैले बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए काम कर रहा था। इस कार्रवाई को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद तेज किया गया, जिसके बाद एजेंसी ने समन्वित छापेमारी अभियान चलाया।

सीबीआई ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पांच अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की, जहां से कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि इन डिवाइसों में ऐसे डिजिटल सबूत मौजूद हैं, जो ठगी की पूरी साजिश और धन के ट्रांसफर के नेटवर्क को उजागर करते हैं।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डुब्बाका महेश, राजेश कन्ना और वायाला श्रीनिवास के रूप में हुई है। इनमें महेश एक निजी बैंक का पूर्व सहायक प्रबंधक रह चुका है। जांच एजेंसी का कहना है कि महेश ने फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाने में अहम भूमिका निभाई, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को घुमाने और छिपाने के लिए किया गया।

वहीं, अन्य दोनों आरोपी कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ यानी ऐसे बैंक खातों की व्यवस्था करने में शामिल थे, जिनका उपयोग अवैध धन के लेनदेन और लेयरिंग के लिए किया जाता है। इन खातों के जरिए पीड़ित से ली गई रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर ट्रेसिंग से बचाने की कोशिश की गई।

जांच के मुताबिक, इस पूरे फ्रॉड का शिकार एक वरिष्ठ नागरिक बना, जिसे साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी या कानून प्रवर्तन से जुड़ा अधिकारी बताकर पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाया और उसे विश्वास दिलाया कि वह किसी गंभीर मामले में फंस चुका है। इस डर के चलते पीड़ित ने कई किश्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का यह तरीका हाल के समय में तेजी से सामने आया है, जिसमें अपराधी वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते हैं। वे पीड़ित को यह यकीन दिलाते हैं कि उसके खिलाफ जांच चल रही है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे।

एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जहां व्यक्ति के डर और भ्रम का फायदा उठाकर उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। ऐसे मामलों में तकनीकी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव भी अहम भूमिका निभाता है।

सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों से जुड़े हैं या नहीं।

विशेषज्ञों ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करने और किसी भी स्थिति में डर या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करने की हिदायत दी गई है। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर इस तरह की धमकी देता है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध किस तेजी से नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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