“हैदराबाद साइबराबाद EOW की बड़ी कार्रवाई: ‘Subhakshetra Projects’ के नाम पर चला फर्जी रियल एस्टेट रैकेट, निवेशकों को लोन और सोना गिरवी रखने पर मजबूर किया”

“₹6.58 करोड़ का निवेश फ्रॉड उजागर: फर्जी प्लॉट स्कीम से 30 से अधिक लोगों से ठगी, आरोपी गिरफ्तार”

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By Roopa
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हैदराबाद। साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में साइबराबाद कमिश्नरेट की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रामावत मधु को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने “Subhakshetra Projects” नाम की फर्जी रियल एस्टेट योजना चलाकर 30 से अधिक निवेशकों से करीब ₹6.58 करोड़ की ठगी की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगियों ने सुनियोजित तरीके से एक संगठित रैकेट तैयार किया था। लोगों को आकर्षक रिटर्न, प्लॉट अलॉटमेंट और इंश्योरेंस लाभ का लालच देकर निवेश के लिए फंसाया गया। यह पूरा नेटवर्क Subhakshetra Projects Private Limited नाम की फर्जी कंपनी के नाम पर संचालित किया जा रहा था।

योजना के तहत निवेशकों को ₹5 लाख का शुरुआती भुगतान, 102 वर्ग गज का प्लॉट, 42 महीनों तक हर महीने ₹25,000 की गारंटीड आय और ₹5 लाख का बीमा कवर देने का झांसा दिया गया था। भरोसा जमाने के लिए आरोपी ने दावा किया कि संगारेड्डी जिले के दमर्गिड्डा गांव में 16 एकड़ की DTCP-अनुमोदित परियोजना विकसित की जा रही है।

जांच में सामने आया कि मियापुर इलाके में एक ऑफिस भी संचालित किया जा रहा था, जहां लोगों को बुलाकर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था और बड़ी रकम वसूली जाती थी।

पुलिस के अनुसार, कई पीड़ितों ने इस झांसे में आकर भारी निवेश किया। कुछ ने बैंक लोन लिया, जबकि कई लोगों ने अपने सोने के गहने तक गिरवी रख दिए। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि जिस जमीन का दावा किया जा रहा था, वह पूरी तरह खरीदी ही नहीं गई थी। न ही किसी निवेशक के नाम कोई प्लॉट रजिस्टर्ड किया गया और न ही वादे के अनुसार कोई मासिक भुगतान किया गया।

जब निवेशकों ने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपी ने बार-बार देरी करते हुए आर्थिक समस्याओं का बहाना बनाया। लंबे समय तक रिफंड न मिलने पर पीड़ितों ने आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत की।

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शिकायत के आधार पर EOW ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की और पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद रामावत मधु को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता और जांच जारी है।

जांच में यह भी सामने आया कि पूरी स्कीम फर्जी दस्तावेजों, झूठे प्रचार और भ्रामक दावों के आधार पर चलाई जा रही थी। निवेशकों को भरोसे में लेने के लिए प्रोजेक्ट को पूरी तरह वैध दिखाने की कोशिश की गई थी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से एक अन्य आपराधिक धमकी का मामला दर्ज है, जिसमें एक चर्चित सिंगर-एक्टर का नाम सह-आरोपी के रूप में सामने आया है। इससे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और गहरी संदिग्ध हो गई है।

इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी “सोशल इंजीनियरिंग और हाई-रिटर्न स्कीम” का इस्तेमाल कर आम लोगों की वित्तीय समझ को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि “नकली प्रोजेक्ट, फर्जी दस्तावेज और गारंटीड रिटर्न का वादा—ये तीन सबसे आम हथकंडे हैं, जिनसे साइबर और आर्थिक ठगी को अंजाम दिया जाता है।”

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला तेजी से बढ़ रहे निवेश धोखाधड़ी के मामलों का उदाहरण है, जहां लोगों को असाधारण रिटर्न का लालच देकर फंसाया जाता है। ऐसे रैकेट अक्सर फर्जी दस्तावेजों और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए काम करते हैं।

EOW अब यह जांच कर रही है कि पैसा किन-किन खातों में ट्रांसफर हुआ, रकम कहां-कहां गई और क्या इसी तरह की अन्य योजनाएं अलग नामों से भी चलाई जा रही थीं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसी निवेश योजना से सतर्क रहें जो असामान्य रूप से अधिक या गारंटीड रिटर्न का दावा करती हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वैध निवेश योजनाएं कभी भी निश्चित मासिक लाभ की गारंटी नहीं देतीं।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी तथा बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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