पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक बड़े GST घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए करीब ₹7 करोड़ की टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया है। पुलिस और जीएसटी विभाग की संयुक्त जांच में यह सामने आया कि 13 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर एक संगठित रैकेट लंबे समय से फर्जी लेनदेन चला रहा था।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब मोहम्मद नईम नामक व्यापारी, जो छोटा खुदागंज इलाके में रहते हैं और शाहजी एंटरप्राइजेज के मालिक हैं, को जीएसटी विभाग की ओर से नोटिस मिला। विभाग ने बताया कि उनके GST ID के तहत लगभग ₹7 करोड़ की खरीद दिखाई गई है, लेकिन उसका कोई रिटर्न फाइल नहीं किया गया है। यह सुनकर व्यापारी चौंक गया क्योंकि उसने ऐसे किसी भी बड़े लेनदेन को अंजाम नहीं दिया था।
जांच में सामने आया कि 12 जनवरी 2026 को एक व्यक्ति अजमल उर्फ समीर राणा, खुद को लोन एजेंट बताकर व्यापारी के पास पहुंचा था। उसने बैंक लोन दिलाने का झांसा देकर GST ID, पासवर्ड और आधार विवरण हासिल कर लिया। इसी डेटा का उपयोग कर बाद में फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन दिखाया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने व्यापारी के GST क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर 13 अलग-अलग शेल कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए। इन बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की गई, जबकि वास्तविक रूप से कोई माल या सेवा का लेनदेन हुआ ही नहीं था।
मामला तब और गंभीर हो गया जब 13 मार्च को जीएसटी विभाग ने व्यापारी को सूचित किया कि उनके नाम पर करोड़ों का कारोबार दर्ज है। जब व्यापारी ने इस पर आपत्ति जताई और आरोपी से संपर्क किया, तो उसे धमकी दी गई और गाली-गलौज भी की गई। इसके बाद उसने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि पूरे नेटवर्क में फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर इनवॉइस जनरेट किए गए और टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया। पुलिस अब सभी 13 कंपनियों के बैंक खातों, रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।
साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के GST फ्रॉड में अक्सर छोटे व्यापारियों के डेटा को निशाना बनाया जाता है और फिर उसे शेल कंपनियों के जरिए बड़े फर्जी लेनदेन में बदल दिया जाता है। इससे न केवल टैक्स चोरी होती है, बल्कि बैंकिंग और क्रेडिट सिस्टम भी प्रभावित होता है।
इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “ऐसे फ्रॉड में अपराधी पहले भरोसा जीतकर डेटा हासिल करते हैं और फिर उसे फर्जी कंपनियों के नेटवर्क में इस्तेमाल करते हैं। GST सिस्टम में डिजिटल डेटा एक्सेस सबसे बड़ा जोखिम बन चुका है।”
अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में इसी तरह की फर्जी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा है।
फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक ट्रांजैक्शन, फर्जी कंपनियों के डायरेक्टर रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग्स को खंगाल रही हैं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं और कई गिरफ्तारियां संभव हैं।
