“Central Bureau of Investigation की कोर्ट में दलील—बड़े साजिश नेटवर्क का खुलासा बाकी; IDFC First और AU Small Finance Bank खातों से करोड़ों की हेराफेरी”

“₹590 करोड़ बैंक घोटाला: फर्जी खातों के जाल में फंसी व्यवस्था, छह आरोपी CBI रिमांड पर”

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By Roopa
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चंडीगढ़। हरियाणा में सामने आए ₹590 करोड़ के बहुचर्चित बैंक घोटाले में जांच ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। Central Bureau of Investigation (CBI) की विशेष अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह घोटाला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक और संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी कई परतें अभी खुलनी बाकी हैं।

इस मामले में जिन आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है, उनमें अभय कुमार, रिभव ऋषि, स्वाति, अभिषेक सिंगला, नरेश कुमार और मनीष जिंदल शामिल हैं। सभी आरोपियों पर फर्जी बैंक खातों के जरिए सरकारी धन की हेराफेरी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

फर्जी खातों और शेल कंपनियों से चला करोड़ों का खेल

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में बड़ी संख्या में फर्जी खाते खुलवाए। इन खातों के जरिए पहले विभिन्न स्रोतों से पैसे ट्रांसफर किए गए, फिर ‘लेयरिंग’ के जरिए रकम को कई खातों में घुमाया गया और अंततः नकद निकासी कर दी गई।

एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में शेल कंपनियों का व्यापक इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकिंग सिस्टम को गुमराह किया गया। आरोपियों ने बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर ट्रांजैक्शनों को वैध दिखाने की कोशिश की, जिससे लंबे समय तक यह घोटाला पकड़ में नहीं आ सका।

पहले ‘अज्ञात’ के खिलाफ FIR, अब सामने आ रहे नाम

CBI ने इस मामले में 8 अप्रैल को ‘अज्ञात’ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह FIR राज्य के विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा 23 फरवरी को दर्ज मूल शिकायत के आधार पर की गई थी। शुरुआती जांच में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शनों और खातों का खुलासा हुआ, जिसके बाद धीरे-धीरे आरोपियों की पहचान सामने आई और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक विश्वासघात जैसी धाराएं लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है।

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‘बड़ी साजिश’ का संकेत, और गिरफ्तारी संभव

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि अब तक गिरफ्तार आरोपी इस पूरे घोटाले की केवल एक कड़ी हैं। एजेंसी का मानना है कि इस साजिश में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है। पूछताछ के दौरान आरोपियों से अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिलने की उम्मीद है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।

इसी आधार पर एजेंसी ने पांच दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने तीन दिन की रिमांड मंजूर की। इस दौरान एजेंसी आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने का प्रयास करेगी।

पहले भी लंबी हिरासत में रह चुके हैं आरोपी

जानकारी के अनुसार, कुछ आरोपी पहले ही राज्य की जांच एजेंसी की हिरासत में रह चुके हैं। अभय कुमार और रिभव ऋषि नौ-नौ दिन तक हिरासत में रहे, जबकि स्वाति और अभिषेक सिंगला सात दिन तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं। वहीं नरेश कुमार और मनीष जिंदल छह दिन तक हिरासत में रहे थे।

इसके बावजूद जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जटिलता और वित्तीय लेनदेन की व्यापकता को देखते हुए अभी और पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण कड़ियां अभी जुड़नी बाकी हैं।

जांच का दायरा बढ़ा, कई खातों की जांच जारी

सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले से जुड़े 100 से अधिक बैंक खातों की जांच की जा रही है। कई खातों को फ्रीज कर दिया गया है और संदिग्ध लेनदेन की फॉरेंसिक जांच जारी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी फंड तक आरोपियों की पहुंच कैसे बनी और किन स्तरों पर सिस्टम में खामियां रहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वित्तीय घोटाले बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करते हैं और इनके जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया जाता है। जांच एजेंसियां अब इस मामले को एक बड़े आर्थिक अपराध के रूप में देखते हुए हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।

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