श्रीनगर। Jammu and Kashmir में सरकारी बैंक खातों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। वित्त विभाग ने सभी सरकारी खातों में केवल आधिकारिक ईमेल आईडी के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला हाल के दिनों में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के मामलों के बाद लिया गया है, जहां बैंक रिकॉर्ड में गलत या निजी ईमेल आईडी के इस्तेमाल से गंभीर जोखिम पैदा हो गए थे।
विभाग द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी खातों से जुड़े सभी संपर्क विवरण—खासकर ईमेल आईडी—अब केवल अधिकृत सरकारी डोमेन के होने चाहिए। जिन खातों में अभी तक पर्सनल या गैर-आधिकारिक ईमेल दर्ज हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर अधिकृत ईमेल से बदलने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम सरकारी फंड की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय से प्राप्त संचार में यह चिंता जताई गई थी कि कई सरकारी खातों में ईमेल आईडी का प्रबंधन ठीक तरीके से नहीं किया जा रहा है। इससे अनधिकृत बदलाव, डेटा लीक और धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है। इसी के मद्देनज़र Government of Jammu and Kashmir ने तुरंत सख्ती दिखाते हुए नई गाइडलाइंस लागू कर दी हैं।
सर्कुलर में ट्रेजरी ऑफिसर्स, ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (DDOs), सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) ऑपरेटर्स और अन्य अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने विभागों में बैंक खातों से जुड़े ईमेल और मोबाइल नंबर की नियमित जांच करें। इसके अलावा, किसी भी संपर्क विवरण में बदलाव करने से पहले सख्त आंतरिक सत्यापन प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य किया गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में संपर्क विवरण सबसे संवेदनशील कड़ी बन चुका है। यदि ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर पर नियंत्रण कमजोर हो, तो साइबर अपराधी आसानी से अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं और फर्जी लेनदेन को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर पासवर्ड रीसेट, OTP इंटरसेप्शन या फर्जी अनुरोध के जरिए खातों से छेड़छाड़ की जाती है।
इस पूरे मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा, “सरकारी खातों में पर्सनल ईमेल का इस्तेमाल एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है। अपराधी सबसे पहले संचार चैनल को टारगेट करते हैं और फिर उसी के जरिए सिस्टम में घुसपैठ करते हैं। आधिकारिक ईमेल अनिवार्य करना एक जरूरी और समय पर उठाया गया कदम है।”
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी विभागों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों तक इन निर्देशों को तत्काल पहुंचाना होगा और अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। आदेशों की अनदेखी करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। यह सर्कुलर प्रशासनिक सचिवों, न्यायिक इकाइयों और अन्य प्रमुख विभागों को भी भेजा गया है, ताकि व्यापक स्तर पर इसका पालन सुनिश्चित हो सके।
विश्लेषकों के अनुसार, डिजिटल गवर्नेंस के बढ़ते दायरे में इस तरह के कदम बेहद जरूरी हो गए हैं। सरकारी फंड से जुड़े खातों में यदि एक छोटी सी चूक भी होती है, तो उसका असर बड़े स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में संपर्क विवरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अब प्रशासनिक मजबूरी बन गई है।
आने वाले समय में इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल सरकारी खातों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि साइबर फ्रॉड के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम डिजिटल वित्तीय सिस्टम में भरोसा बढ़ाने और सार्वजनिक धन की रक्षा के लिए एक अहम पहल माना जा रहा है।
