“आरोपों पर टीसीएस का सख्त रुख, डेलॉइट और ट्राइलीगल की मदद से जांच तेज; कंपनी ने सभी दावों को बताया भ्रामक”

“टीसीएस नासिक केस में बड़ा अपडेट: स्वतंत्र कमेटी करेगी पूरे मामले की अंतिम जांच”

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By Roopa
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नासिक/मुंबई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने नासिक मामले में चल रही जांच को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की अंतिम और निष्पक्ष समीक्षा एक स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी द्वारा की जाएगी, जिसका उद्देश्य सभी तथ्यों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है। यह कमेटी अब आंतरिक जांच रिपोर्ट का गहन मूल्यांकन कर अंतिम निष्कर्ष तैयार करेगी।

कंपनी के अनुसार, इस पूरे मामले की आंतरिक जांच मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) आर्थी सुब्रमणियन के नेतृत्व में चल रही है। इसके साथ ही जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए वैश्विक ऑडिट फर्म डेलॉइट और कानूनी सलाहकार संस्था ट्राइलीगल को भी शामिल किया गया है। इन बाहरी विशेषज्ञों की भागीदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और मानकों के अनुरूप हो।

टीसीएस ने इस मामले से जुड़े कई आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी ने साफ किया है कि निदा खान न तो एचआर मैनेजर हैं और न ही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी किसी जिम्मेदारी में थीं। कंपनी के मुताबिक, उनके बारे में जो भी दावे सामने आए हैं, वे तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं और उनका वास्तविक भूमिका से कोई संबंध नहीं है।

इसके अलावा, कंपनी ने इस दावे को भी गलत बताया है कि नासिक यूनिट को बंद कर दिया गया है। टीसीएस ने स्पष्ट किया कि यूनिट में संचालन सामान्य रूप से जारी है और कामकाज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। कंपनी ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलाई जा रही कुछ सूचनाएं बिना पुष्टि के हैं और उन्हें जांच पूरी होने तक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

टीसीएस ने अपने बयान में यह भी बताया कि प्रारंभिक समीक्षा के दौरान कंपनी के आंतरिक शिकायत तंत्र—जिसमें POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम नीति) चैनल और एथिक्स हेल्पलाइन शामिल हैं—में ऐसे किसी औपचारिक शिकायत का रिकॉर्ड नहीं मिला है, जो सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से मेल खाता हो। कंपनी ने दोहराया कि उसका अनुपालन ढांचा मजबूत है और हर शिकायत को निर्धारित प्रक्रिया के तहत गंभीरता से लिया जाता है।

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जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों, ईमेल संचार, डिजिटल रिकॉर्ड और इंटरव्यू का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या कहीं कोई प्रक्रियात्मक चूक हुई है या सभी नियमों का सही पालन किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी इस जांच का सबसे अहम हिस्सा है, जो अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी सबूतों और निष्कर्षों की बारीकी से समीक्षा करेगी। इस कमेटी की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि निर्णय किसी भी प्रकार के दबाव या पूर्वाग्रह से प्रभावित न हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कॉरपोरेट मामलों में अब मल्टी-लेयर जांच प्रणाली अपनाई जा रही है, जिसमें आंतरिक टीमों के साथ-साथ बाहरी ऑडिटर्स और स्वतंत्र कमेटियां भी शामिल होती हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है बल्कि हितधारकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

टीसीएस ने दोहराया है कि अभी तक किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है और सभी कार्रवाई केवल प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही की जाएगी। कंपनी ने अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अटकलों या अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए।

फिलहाल ओवरसाइट कमेटी आने वाले हफ्तों में अपनी समीक्षा प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में काम कर रही है। अंतिम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई और सिफारिशें औपचारिक रूप से प्रस्तुत की जाएंगी, जिसके आधार पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

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