गुरुग्राम में खुदाई में मिले सोने के सिक्कों के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले इंटरस्टेट गैंग का भंडाफोड़, भारी नकदी और सोना बरामद

लालच बना जाल: ‘खुदाई में मिले सोने’ की कहानी से करोड़ों की ठगी

Team The420
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गुरुग्राम। सस्ते दामों में सोने के सिक्के बेचने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह का सरगना चौथी पास बताया जा रहा है, जिसने सुनियोजित तरीके से न केवल आम लोगों को बल्कि फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों तक को अपना शिकार बनाया। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

जांच के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड सोलंकी प्रभु भाई है, जो पिछले करीब 25 वर्षों से इस तरह की वारदातों को अंजाम देता आ रहा था। उसके साथ गिरफ्तार आरोपियों में मनीष कमलेश, ईश्वर मारवाड़ी और पंकज शर्मा शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से ₹2 करोड़ 30 लाख 5 हजार 700 की नकदी और 678 ग्राम सोना बरामद किया गया है, जिससे ठगी के बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है।

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यह मामला तब सामने आया जब फरवरी में गुरुग्राम के एक कारोबारी को इस गिरोह ने अपने जाल में फंसाया। शिकायत के अनुसार, कारोबारी पचगांव चौक के पास अपनी कार की स्टेपनी बदल रहा था, तभी एक व्यक्ति उसके पास पहुंचा और खुद को खुदाई का काम करने वाला मजदूर बताया। उसने दावा किया कि खुदाई के दौरान उसे सोने के सिक्के मिले हैं, जिन्हें वह खुले बाजार में बेचने से डरता है, क्योंकि पुलिस कार्रवाई का खतरा है।

आरोपी ने कारोबारी को सस्ते दामों में सोने के सिक्के बेचने का प्रस्ताव दिया और कुछ सिक्के जांच के लिए दिए। कारोबारी ने ज्वेलर्स के पास जाकर उनकी जांच कराई, जहां वे असली सोना पाए गए। इसी भरोसे के आधार पर आगे बातचीत हुई और कुछ दिनों बाद आरोपी ने बड़ी मात्रा में सिक्के बेचने की पेशकश की।

बताया गया कि आरोपी एक झोले में करीब 10 से 11 किलो सिक्के लेकर आया और एक किलो के बदले ₹1 करोड़ की मांग की। लालच में आकर कारोबारी ने पांच किलो सोने के सिक्के खरीदने का फैसला किया। इसके लिए उसने अपना घर गिरवी रखकर ₹2.5 करोड़ नकद और परिवार के जेवर तक सौंप दिए। हालांकि, करीब 20 दिन बाद जब सिक्कों की दोबारा जांच कराई गई, तो वे पीतल के निकले, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ।

जांच एजेंसियों ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य साधारण मजदूर या गरीब व्यक्ति का भेष बनाकर लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें ‘खुदाई में मिले सोने’ की कहानी सुनाकर भरोसे में लेते थे। यह गिरोह खासतौर पर हाईवे, सुनसान इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर अकेले लोगों को निशाना बनाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है, जिसमें हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल हैं। आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में इसी तरह की कई वारदातों को अंजाम दिया है। इतना ही नहीं, सरगना ने पहले भी फिल्मी हस्तियों और उनके सहयोगियों को इसी तरह ठगा था, हालांकि उन मामलों में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि नकली सोने के सिक्के दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में तैयार किए जाते थे और फिर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किए जाते थे। गिरोह में कुछ महिला सदस्य भी शामिल बताई गई हैं, जो पहले भी इसी तरह के मामलों में पकड़ी जा चुकी हैं।

आरोपियों की जीवनशैली और गतिविधियों ने भी जांच एजेंसियों को चौंकाया है। बताया गया कि मास्टरमाइंड ने ठगी के पैसों से होटल खरीदा और फिल्मों में निवेश तक किया। इसके अलावा उसने कई शादियां कर रखी हैं और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहने की कोशिश की।

अदालत में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में अभी कई अहम कड़ियों की जांच बाकी है, जिसमें बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपत्तियों की पहचान शामिल है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि जल्द और ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच किस तरह लोगों को ठगी का शिकार बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संदिग्ध सौदे या असामान्य रूप से सस्ते ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस अंतरराज्यीय ठगी गिरोह के और गहरे राज सामने आ सकते हैं

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