हैदराबाद में ATM पर फर्जी डिजिटल पेमेंट स्क्रीन दिखाकर ग्राहकों से नकद ठगी करने वाले दो शातिर आरोपी गिरफ्तार

ATM में ध्यान भटकाकर ठगी का खेल: फर्जी डिजिटल पेमेंट दिखाकर ग्राहकों से कैश उड़ाने वाले दो शातिर गिरफ्तार

Team The420
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हैदराबाद। शहर में एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनों के पास लोगों को निशाना बनाकर नकद ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। नरायणगुड़ा पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो डिजिटल पेमेंट का झांसा देकर लोगों से नकदी लेकर फरार हो जाते थे।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद सलमान (26), जो पेशे से रैपिडो चालक है और पहाड़ीशरीफ का निवासी है, तथा अज़ान तौक़ीर खान (19), जो मलकपेट का छात्र है, के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनों पर आने वाले ग्राहकों को निशाना बनाते थे।

जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले एटीएम पर मौजूद लोगों से संपर्क करते थे और उनसे नकद पैसे मांगते थे। बदले में वे तुरंत GPay या UPI के जरिए रकम ट्रांसफर करने का भरोसा दिलाते थे। भरोसा जीतने के बाद वे पीड़ित का मोबाइल नंबर लेकर डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया दिखाते थे, लेकिन असल में फर्जी “सक्सेस स्क्रीन” बनाकर दिखाते और नकद लेकर मौके से फरार हो जाते थे।

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यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित आदित्य अग्रवाल ने 13 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वे ताजमहल होटल के पास स्थित एसबीआई एटीएम में 20,000 रुपये जमा करने गए थे, तभी एक युवक ने उनसे नकद लेकर डिजिटल पेमेंट का वादा किया। कुछ ही देर में आरोपी ने स्क्रीन पर भुगतान सफल दिखाकर उन्हें भ्रमित किया और मौके से भाग गया। बाद में पीड़ित को पता चला कि उनके खाते में कोई पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच शुरू की और आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया। इसके बाद दोनों को मलकपेट इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में दोनों ने नरायणगुड़ा, मसाब टैंक, सुल्तान बाजार, IS सदन और डोमलगुडा थाना क्षेत्रों में हुई पांच अन्य ठगी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है।

जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। पहले पीड़ित को विश्वास में लिया जाता, फिर डिजिटल पेमेंट का झांसा देकर नकद हड़प लिया जाता। इसके बाद फर्जी स्क्रीन या ऐप इंटरफेस दिखाकर लोगों को भ्रमित किया जाता था ताकि वे तुरंत शिकायत न कर सकें।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों का तरीका मुख्य रूप से “अटेंशन डाइवर्जन फ्रॉड” पर आधारित था, जिसमें पीड़ित का ध्यान भटकाकर तुरंत धोखाधड़ी की जाती थी। इसी तरह के पैटर्न कई अन्य मामलों में भी सामने आए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक छोटे नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में तकनीक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक चाल का इस्तेमाल किया जाता है। अपराधी लोगों की जल्दी भरोसा करने की प्रवृत्ति का फायदा उठाते हैं और डिजिटल पेमेंट को वास्तविक दिखाने के लिए नकली इंटरफेस तैयार करते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि एटीएम या सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अजनबी को नकद न दें, और किसी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन को अपने बैंक ऐप में जांचे बिना स्वीकार न करें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ट्रांजैक्शन की पुष्टि के बिना कोई भी लेन-देन सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या अन्य साथी भी सक्रिय हैं।

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