दुबई से संचालित ऑनलाइन गेमिंग ठगी नेटवर्क में 74 फर्जी ब्रांच, करोड़ों की ठगी, लग्जरी ट्रिप और कैसीनो पार्टियों का खुलासा

₹1 करोड़ की शैंपेन पार्टियां, गोवा-थाईलैंड ट्रिप और कैसीनो मस्ती: दुबई से चल रहे गेमिंग ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश

Team The420
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कानपुर। प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग एप्स के क्लोन बनाकर चलाए जा रहे एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। इस रैकेट में विदेशी कनेक्शन, लग्जरी लाइफस्टाइल और हाई-स्टेक्स जुआ जैसी गतिविधियों के जरिए एजेंटों को आकर्षित करने और बनाए रखने का चौंकाने वाला तरीका सामने आया है।

बर्रा पुलिस के अनुसार यह पूरा नेटवर्क दुबई से संचालित किया जा रहा था, जबकि इसके मुख्य ऑपरेटर दिल्ली, नोएडा और हरियाणा में बैठे हुए थे। जांच में अब तक उत्तर प्रदेश में इस ठगी नेटवर्क की 74 फर्जी ब्रांचों का पता चला है, जो अलग-अलग शहरों में सक्रिय थीं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा सिस्टम एक कॉरपोरेट मॉडल की तरह काम करता था, जिसमें हर ब्रांच को हर महीने करीब ₹1 करोड़ का टारगेट दिया जाता था। टारगेट पूरा करने वाली टीमों को इनाम के तौर पर गोवा, थाईलैंड और नेपाल जैसी जगहों की लग्जरी ट्रिप पर भेजा जाता था, जहां वे पार्टी, कैसीनो और महंगे खर्चों में लाखों रुपये उड़ाते थे।

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जांच में सामने आया है कि ब्रांच-24 नाम की एक यूनिट को हाल ही में टारगेट पूरा करने के बाद स्पॉन्सर्ड विदेश यात्रा पर भेजा गया था। इस दौरान एजेंटों ने महंगी शैंपेन खोली, जिनकी कीमत करीब ₹1 लाख प्रति बोतल बताई जा रही है। इसके अलावा कैसीनो में भी भारी रकम जुए और मनोरंजन में खर्च की गई।

ठगी का यह पूरा खेल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चलता था, जहां टेलीग्राम लिंक, सोशल मीडिया रील्स और विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को निवेश और गेमिंग के नाम पर फंसाया जाता था। एक बार यूजर जुड़ जाने के बाद उसे क्लोन एप्स पर ले जाया जाता था, जो असली गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे दिखते थे, लेकिन पूरी तरह से इस गिरोह के नियंत्रण में होते थे।

पुलिस के अनुसार, ठगी से वसूली गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि पैसे के स्रोत को छिपाया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में फर्जी जीएसटी फर्मों और म्यूल बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

मोहाली में एक विशेष टीम को भेजा गया है, जहां एक जीएसटी फर्म के नाम पर खोले गए पांच बैंक खातों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह फर्म असली है या केवल कागजी दस्तावेजों पर आधारित शेल कंपनी, इसकी गहन जांच की जा रही है। जीएसटी विभाग से भी रिपोर्ट साझा की गई है।

बर्रा पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। ऊपर बैठे ऑपरेटर रणनीति तय करते थे, जबकि नीचे की ब्रांचें ग्राहकों की भर्ती, पैसे जमा करने और लेनदेन की जिम्मेदारी संभालती थीं। हर स्तर पर डिजिटल माध्यम से निगरानी और टारगेट आधारित सिस्टम लागू था।

एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक डेटा विश्लेषण से पता चला है कि यह एक जटिल वित्तीय नेटवर्क है, जो देश के भीतर और बाहर पैसों के प्रवाह को छिपाने के लिए कई स्तरों का इस्तेमाल करता है। अधिकारी ने कहा, “हम बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रहे हैं। यह एक लेयर्ड सिस्टम है, जिसे ट्रेस करना आसान नहीं है।”

इस खुलासे के बाद पुलिस ने कई अन्य ब्रांचों की तलाश तेज कर दी है, जबकि कई एजेंट मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क का संचालन कर रहे मास्टरमाइंड विदेश में बैठकर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए पूरा सिस्टम चला रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ऑनलाइन ठगी नेटवर्क अब कॉरपोरेट स्ट्रक्चर की तरह काम कर रहे हैं, जहां आकर्षक इनाम, विदेशी ट्रिप और हाई-प्रॉफिट का लालच देकर युवाओं को जोड़ा जाता है।

फिलहाल पुलिस की कई टीमें अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं और बाकी ब्रांचों की पहचान करने तथा पूरे वित्तीय नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और बड़े वित्तीय खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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