ACB ट्रैप में पकड़ी गईं करौली SDM काजल मीणा, रिश्वत के ₹60 हजार और बैग से मिले ₹4 लाख नकद ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

फाइल से फंड तक: करौली SDM काजल मीणा पर ACB का शिकंजा, रिश्वत लेते पकड़ी गईं

Team The420
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करौली। राजस्थान के करौली जिले के नादौती उपखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने गुरुवार शाम सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के तहत उपखंड अधिकारी (SDM) काजल मीणा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई में उनके साथ जुड़े दो अन्य कर्मचारी—रीडर दिनेश कुमार सैनी और वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़—को भी हिरासत में लिया गया है। मौके से ₹60 हजार की रिश्वत राशि बरामद हुई, वहीं उसी बैग से ₹4 लाख नकद मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भूमि की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले अवैध वसूली से जुड़ा है। परिवादी ने शिकायत में आरोप लगाया था कि एसडीएम काजल मीणा अपने रीडर दिनेश सैनी के माध्यम से ₹50 हजार रिश्वत की मांग कर रही थीं, जबकि ₹10 हजार अतिरिक्त रीडर के हिस्से के तौर पर मांगे गए थे। शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने इस पूरे घटनाक्रम पर निगरानी शुरू की और आरोपों की पुष्टि होने पर ट्रैप की योजना बनाई गई।

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जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इससे पहले परिवादी से ₹1 लाख की मांग की जा चुकी थी, जिसमें से ₹50 हजार पहले ही वसूले जा चुके थे। शेष राशि लेने के लिए परिवादी को गुरुवार को नादौती स्थित उपखंड कार्यालय बुलाया गया। ACB टीम पहले से ही मौके पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही तय योजना के अनुसार रिश्वत की राशि का आदान-प्रदान हुआ, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान जो परिस्थितियां सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। रीडर दिनेश सैनी ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम एसडीएम तक पहुंचाने की भूमिका निभाई, जबकि वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ को रकम लेकर कार्यालय पहुंचते हुए पकड़ा गया। जिस बैग में ₹60 हजार की रिश्वत रखी गई थी, उसी में ₹4 लाख की अतिरिक्त नकदी भी मिली। यह रकम किस स्रोत से आई और किस उद्देश्य से रखी गई थी, यह अब जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

यह मामला न केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का उदाहरण है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त संभावित नेटवर्क पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। भूमि से जुड़े मामलों में अक्सर देरी और प्रक्रियागत जटिलताओं का फायदा उठाकर अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में अब निगरानी एजेंसियां अधिक सक्रियता के साथ काम कर रही हैं।

ACB फिलहाल तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। उनके संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह मामला किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है। साथ ही जब्त की गई ₹4 लाख की नकदी के स्रोत का पता लगाने के लिए वित्तीय जांच भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। इस मामले में साक्ष्यों को मजबूत करने और पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस केस में और गिरफ्तारियां या खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में आक्रोश और चर्चा दोनों देखने को मिल रहे हैं। आम नागरिकों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। वहीं, यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश भी देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत मिलने पर एजेंसियां अब त्वरित और निर्णायक कदम उठा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रैप ऑपरेशन न केवल दोषियों को पकड़ने में मददगार होते हैं, बल्कि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत निवारक के रूप में भी काम करते हैं। यदि इसी तरह की सतत कार्रवाई जारी रही, तो प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जनता का विश्वास दोनों मजबूत हो सकते हैं।

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