नई दिल्ली। देश में डिजिटल लेंडिंग के तेजी से विस्तार के बीच एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड सामने आ रहा है—PAN आधारित लोन धोखाधड़ी। इस स्कैम में अपराधी किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके PAN का इस्तेमाल कर लोन ले लेते हैं, और पीड़ित को इसका पता तब चलता है जब उसका क्रेडिट स्कोर खराब हो चुका होता है या रिकवरी कॉल्स आने लगती हैं। यह धोखाधड़ी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मानसिक तनाव और कानूनी परेशानियां भी खड़ी कर देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी केवल PAN नंबर का उपयोग नहीं करते, बल्कि इसके साथ आधार, मोबाइल नंबर और जन्मतिथि जैसी अन्य संवेदनशील जानकारियों को जोड़कर एक पूरी फर्जी पहचान तैयार करते हैं। ये जानकारियां अक्सर डेटा लीक, फिशिंग लिंक या नकली मोबाइल ऐप्स के जरिए हासिल की जाती हैं। इसके बाद डिजिटल KYC प्रक्रिया को धोखा देने के लिए AI आधारित फोटो या वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सिस्टम को यह लगता है कि आवेदन वास्तविक है।
प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, “आज के साइबर अपराधी केवल तकनीक पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर एक ‘डिजिटल प्रोफाइल’ तैयार करते हैं। PAN फ्रॉड इसी का एक उन्नत रूप है, जहां पहचान की चोरी और तकनीकी खामियों का खतरनाक मेल देखने को मिलता है।”
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इसके बाद अपराधी किसी नए सिम कार्ड या eSIM के जरिए OTP प्राप्त करते हैं और इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप्स या फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर आवेदन करते हैं। लोन अप्रूव होते ही रकम को तुरंत ‘म्यूल अकाउंट्स’ में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित को तब तक कुछ भी पता नहीं चलता, जब तक कि उसके क्रेडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने नहीं आती।
इस फ्रॉड के बढ़ने के पीछे कई सिस्टम खामियां भी जिम्मेदार हैं। कई लेंडर्स अभी भी OTP आधारित वेरिफिकेशन पर ज्यादा निर्भर हैं, जबकि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर KYC मानक एक जैसे नहीं हैं। वीडियो KYC में कमजोर ‘लाइकेनेस डिटेक्शन’ और रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग की कमी के कारण अपराधी एक ही PAN पर कई लोन लेने में सफल हो जाते हैं। जब तक क्रेडिट ब्यूरो इस जानकारी को अपडेट करते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोग नियमित रूप से अपना क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें। अगर किसी अनजान लोन, अज्ञात लेंडर या नए अकाउंट की एंट्री दिखती है, तो यह शुरुआती चेतावनी हो सकती है। इस स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
यदि किसी को पता चलता है कि उसके नाम पर फर्जी लोन लिया गया है, तो सबसे पहले संबंधित लेंडर से संपर्क कर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करनी चाहिए और लोन से जुड़े सभी दस्तावेज मांगने चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना और स्थानीय थाने या साइबर सेल में FIR कराना जरूरी है। साथ ही क्रेडिट ब्यूरो को सूचित कर उस लोन को ‘फ्रॉड’ के रूप में चिह्नित करवाना चाहिए।
प्रो. त्रिवेणी सिंह आगे चेतावनी देते हैं, “सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग घबराहट में आकर फर्जी लोन को चुका देते हैं। ऐसा करने से कानूनी रूप से यह संकेत मिलता है कि आपने लोन स्वीकार कर लिया है, जिससे आपका केस कमजोर पड़ सकता है। हमेशा पहले शिकायत दर्ज करें और जांच पूरी होने दें।”
दस्तावेजों की बात करें तो पीड़ित को पहचान प्रमाण, शिकायत की कॉपी, लेंडर के साथ हुई बातचीत और क्रेडिट ब्यूरो में दर्ज आपत्ति का रिकॉर्ड रखना चाहिए। KYC दस्तावेजों की मांग करने से यह भी पता चल सकता है कि डेटा लीक कहां से हुआ।
क्रेडिट स्कोर को सुधारने में समय लगता है। आमतौर पर 30 से 60 दिनों में शुरुआती सुधार दिखता है, जबकि पूरी तरह रिकवरी में 3 से 6 महीने तक लग सकते हैं। इस दौरान समय पर EMI भुगतान और नए लोन से बचना फायदेमंद होता है।
बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सीमित रूप से साझा किया जाए। अनजान वेबसाइट्स और ऐप्स से दूर रहें, आधार का ‘मास्क्ड वर्जन’ उपयोग करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम रखें। समय पर रिपोर्टिंग और सतर्कता ही इस तरह के फ्रॉड से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
