भुवनेश्वर/कानपुर। ऑनलाइन निवेश के नाम पर बढ़ते साइबर अपराधों के बीच ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ₹71.74 लाख की ठगी के आरोप में उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला न केवल डिजिटल निवेश धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह साइबर अपराधी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 26 वर्षीय हर्षित कांत पांडे के रूप में हुई है, जो कानपुर का निवासी है। उसे उस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जो नंदनकानन क्षेत्र की सुजाता साहू द्वारा अपनी बहन दीप्ति साहू की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सामने आया था। दीप्ति साहू, जो वर्तमान में विदेश में रह रही हैं, वर्ष 2024 में भुवनेश्वर में रहने के दौरान इस साइबर ठगी का शिकार हुई थीं।
जांच में सामने आया है कि पीड़िता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक आकर्षक निवेश विज्ञापन के जरिए आरोपियों के संपर्क में आई थीं। शुरुआती बातचीत के बाद उन्हें उच्च मुनाफे का भरोसा दिलाया गया और धीरे-धीरे उन्हें एक सुनियोजित निवेश योजना में शामिल कर लिया गया। आरोपियों ने खुद को विश्वसनीय वित्तीय सलाहकार के रूप में पेश किया और पीड़िता का विश्वास जीतने में सफल रहे।
इस पूरे फ्रॉड का मुख्य आधार था ‘IPO निवेश का झांसा’। आरोपियों ने पीड़िता को बार-बार यह विश्वास दिलाया कि यदि वह प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में बड़ी राशि निवेश करती हैं, तो उन्हें बेहद आकर्षक रिटर्न मिलेगा। इसी लालच में आकर पीड़िता ने आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹71,74,664 की राशि ट्रांसफर कर दी।
हालांकि, जब अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला और आरोपी टालमटोल करने लगे, तब पीड़िता को शक हुआ। इसके बाद मामला शिकायत के रूप में दर्ज कराया गया। जांच एजेंसियों ने जब इस मामले की पड़ताल शुरू की, तो पैसे के लेन-देन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपी की पहचान की गई।
साइबर क्राइम और आर्थिक अपराध से जुड़ी टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को कानपुर स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाया गया। बाद में भुवनेश्वर की अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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जांच के दौरान एक अहम खुलासा यह भी हुआ कि आरोपी पहले भी साइबर अपराध के मामलों में संलिप्त रहा है। हरियाणा में भी उसे एक अन्य साइबर फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया जा चुका है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उसके खिलाफ कुल 65 शिकायतें दर्ज हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय रहा है।
प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि वह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और ठगी की कुल राशि कितनी है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ‘हाई रिटर्न’ का लालच सबसे बड़ा जाल होता है। निवेश के नाम पर दिए जाने वाले अवास्तविक वादे अक्सर धोखाधड़ी की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद कई लोग बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के बड़ी रकम निवेश कर देते हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी ऑनलाइन निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है। अनजान प्लेटफॉर्म, संदिग्ध लिंक या बिना पंजीकरण वाले निवेश विकल्पों से दूरी बनाकर रखना ही सुरक्षित रणनीति है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ निवेश की मनोविज्ञान को भी समझ चुके हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने, किसी भी लालच में न आने और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करने की जरूरत है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह स्पष्ट हो रहा है कि डिजिटल निवेश ठगी के मामले लगातार जटिल और संगठित होते जा रहे हैं—और यही चुनौती आने वाले समय में साइबर सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
