मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बड़े ठगी मामले ने कारोबारी जगत में हलचल मचा दी है, जहां एक कपड़ा व्यापारी से कथित तौर पर ₹25 लाख की धोखाधड़ी कर ली गई। आरोप है कि खुद को प्रभावशाली राजनीतिक संपर्कों वाला बताकर पिता–पुत्र की जोड़ी ने “दूध सप्लाई टेंडर” दिलाने के नाम पर यह पूरा खेल रचा और वर्षों तक अलग-अलग बहानों से रकम वसूलते रहे। मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है और पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
पीड़ित आकिल, निवासी खुशहाल नगर, लिसाड़ीगेट क्षेत्र ने शिकायत में बताया कि गाजियाबाद के मुरादनगर और प्रीत विहार क्षेत्र से जुड़े गुलफामुद्दीन उर्फ गुलजार नामक व्यक्ति ने पहले खुद को राजनीतिक रसूख वाला बताया और धीरे-धीरे उसका विश्वास जीत लिया। आरोपी ने कथित रूप से मंत्री और विधायकों से संबंध होने का दावा करते हुए फर्जी फोटो, पहचान पत्र और लेटरहेड दिखाकर खुद को सरकारी तंत्र से जुड़ा व्यक्ति बताया।
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में कारोबारी को सामाजिक कार्यों के नाम पर भरोसे में लिया गया और उससे करीब 100 सूट भी लिए गए, जिनका आंशिक भुगतान ऑनलाइन किया गया। इसके बाद 2021 में आरोपी ने पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग में दूध सप्लाई का बड़ा टेंडर दिलाने का झांसा दिया। इसी बहाने सिक्योरिटी मनी, प्रोसेसिंग फीस और अन्य खर्चों के नाम पर अलग-अलग किस्तों में करीब ₹25 लाख की रकम वसूल ली गई।
पीड़ित का आरोप है कि हर बार नए नियम और नए खर्च का हवाला देकर पैसे मांगे जाते रहे, जिससे उसे लगातार दबाव में रखा गया। जब उसने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो आरोपियों ने न केवल भुगतान से इनकार किया, बल्कि उसे और उसके बेटे को झूठे मुकदमों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी भी दी।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने फर्जी सरकारी दस्तावेज, लेटरहेड और अधिकारियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर एक संगठित तरीके से ठगी को अंजाम दिया। इसी आधार पर उसने कई लोगों को टेंडर और सरकारी काम दिलाने का लालच देकर पैसे ऐंठे।
स्थानीय पुलिस ने शिकायत के आधार पर पिता–पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक लोगों को गुमराह किया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस गिरोह से और भी लोग जुड़े हुए हैं और कितने अन्य व्यापारी इसके शिकार हुए हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि फर्जी सरकारी पहचान और दस्तावेज तैयार करने में किस स्तर पर सहयोग लिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जहां ठग सरकारी योजनाओं और टेंडर सिस्टम की जटिलता का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। खासकर व्यापारी वर्ग, जो बड़े ठेकों और सरकारी कामों की उम्मीद में आसानी से ऐसे झांसे में आ जाता है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि किसी भी सरकारी टेंडर या बड़े वित्तीय प्रस्ताव में निवेश करने से पहले पूरी तरह सत्यापन बेहद जरूरी है। पुलिस अब आरोपियों की संपत्ति, बैंक लेनदेन और संपर्कों की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके।
