नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो कथित रूप से चीन में बैठे हैंडलर्स के टेलीग्राम चैनलों से संचालित हो रहा था। इस कार्रवाई में एक बैंक रिलेशनशिप मैनेजर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह पर आरोप है कि यह फर्जी लिंक, APK फाइल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में लोगों से ठगी कर रहा था और रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेश भेजा जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर आकर्षक ऑफर और निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को फंसाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति लिंक या APK फाइल डाउनलोड करता था, उसका मोबाइल डेटा और बैंकिंग एक्सेस ठगों के हाथ लग जाता था। इसके बाद म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग लेयर में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में बैंक रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार, मेरठ निवासी शौकीन और उसका भतीजा शाहरुख शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, फ्रांशु कुमार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाने में मदद करता था और हर खाते के बदले 10 से 15 हजार रुपये कमीशन लेता था। वहीं शौकीन और शाहरुख उन खातों को ऑपरेट करके ठगी की रकम आगे पहुंचाते थे।
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने मात्र ढाई महीनों में करीब एक करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। यह रकम अलग-अलग म्यूल खातों में जमा की जाती थी और फिर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चीन स्थित हैंडलर्स को ट्रांसफर कर दी जाती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने करीब 50 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया।
शाहरुख ने पूछताछ में बताया कि उसे टेलीग्राम के जरिए चीन से जुड़े साइबर अपराधियों ने 15 दिन की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी थी। इस ट्रेनिंग में उसे बताया गया कि किस तरह फर्जी खातों का इस्तेमाल कर पैसे को ट्रैकिंग से बचाया जा सकता है। शाहरुख की पहचान बेहद सीमित शिक्षा वाले व्यक्ति के रूप में भी सामने आई है, जो अपने परिवार के साथ एक छोटा व्यवसाय करता था।
पुलिस को बैंक खातों, एटीएम कार्ड और टेलीग्राम चैट के कई डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसमें भारत के कई राज्यों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “ऐसे नेटवर्क सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी ऐप और डिजिटल प्रलोभन के जरिए आम लोगों को निशाना बनाते हैं। एक बार भरोसा बन जाने के बाद पीड़ित की पूरी वित्तीय जानकारी धीरे-धीरे खाली कर दी जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी संचालित टेलीग्राम चैनल अब भारत में साइबर अपराध का बड़ा माध्यम बन चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि बैंक मैनेजर की भूमिका विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि उसने सिस्टम के भीतर रहकर फर्जी खातों को वैधता देने का काम किया। इससे ठगों को पैसा ट्रैक होने से बचाने में मदद मिली।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे के अंतिम गंतव्य का पता लगाने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं
