मुंबई। नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO यूनिट से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने गंभीर आरोपों की जांच तेज कर दी है। इस केस में यौन उत्पीड़न, जबरन दबाव डालने और कथित रूप से धर्मांतरण के प्रयासों जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में अब तक नौ FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न, बलात्कार, मारपीट और धार्मिक परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
यह जांच तब शुरू हुई जब कई महिला कर्मचारियों ने अपने साथ कार्यस्थल पर कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों के आधार पर नासिक पुलिस ने फरवरी में एक गुप्त ऑपरेशन चलाया, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया, जबकि पुरुष अधिकारियों ने सुरक्षा और तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका निभाई। इस रणनीति से पुलिस को अंदरूनी जानकारी और कर्मचारियों के बीच हो रही बातचीत तक पहुंच बनाने में मदद मिली।
जांच में सामने आया कि व्हाट्सऐप चैट्स और आंतरिक संवाद में पीड़ितों और आरोपियों के बीच कथित रूप से दबाव और अनुचित व्यवहार के संकेत मिले हैं। कुछ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन पर धार्मिक गतिविधियों का पालन करने का दबाव बनाया गया, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कार्यस्थल पर भावनात्मक दबाव और मानसिक नियंत्रण का इस्तेमाल किया गया।
इस मामले में एक मलेशिया आधारित व्यक्ति ‘इरमान’ की भूमिका भी सामने आई है, जिसके बारे में आरोप है कि उसने वीडियो कॉल के जरिए कुछ महिला कर्मचारियों से संपर्क किया था। पुलिस को संदेह है कि इस पूरे मामले में बाहरी प्रभाव, वित्तीय प्रलोभन और मानसिक दबाव जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच जारी है।
पुलिस अब आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी बाहरी फंडिंग या पैसों के लेनदेन से इस गतिविधि को समर्थन मिला था। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला केवल आंतरिक स्तर तक सीमित है या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
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अब तक इस केस में सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही एक वरिष्ठ HR मैनेजर पर भी जांच चल रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने महिला कर्मचारियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि समय पर शिकायतों पर कार्रवाई की जाती, तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था।
इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित SIT, जिसका नेतृत्व ACP (क्राइम) संदीप मिटके कर रहे हैं, अब विभिन्न कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है। कई पीड़ितों ने मानसिक उत्पीड़न, यौन शोषण और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भी मामले को गंभीर बताया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इसे “बेहद चिंताजनक” करार देते हुए कहा है कि विस्तृत आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। कंपनी ने अपनी शून्य-सहनशीलता नीति को दोहराते हुए कहा है कि जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच कई स्तरों पर जारी है, जिसमें डिजिटल फॉरेंसिक, वित्तीय जांच और गवाहों के बयान शामिल हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसी तरह की शिकायतें अन्य स्थानों पर भी दर्ज हुई हैं।
जैसे-जैसे SIT की जांच आगे बढ़ रही है, इस मामले के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है और आने वाले दिनों में और सबूत व नए नाम सामने आ सकते हैं।
