रांची। झारखंड में सरकारी खजाने से कथित अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने घोषणा की है कि राज्य गठन के बाद से अब तक सभी 33 ट्रेजरी का विस्तृत और व्यापक ऑडिट कराया जाएगा, ताकि वर्षों से चली आ रही संभावित गड़बड़ियों की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब हाल ही में हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए थे। इन घटनाओं के बाद राज्य की वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से निकाली गई किसी भी राशि की पहचान कर उसकी पूरी वसूली की जाएगी। सरकार का मानना है कि लंबे समय से चल रही अनियमितताओं को खत्म करने के लिए यह ऑडिट बेहद जरूरी है।
इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व एक वरिष्ठ IAS अधिकारी कर रहे हैं। इस टीम में महालेखा परीक्षक (Accountant General) कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया में वित्तीय विशेषज्ञता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। यह टीम राज्य की सभी ट्रेजरी इकाइयों के रिकॉर्ड, भुगतान प्रणाली और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच करेगी।
सरकार के अनुसार यह अनियमितताएं अचानक सामने नहीं आई हैं, बल्कि कई वर्षों से चल रही प्रणालीगत खामियों का परिणाम हैं, जिन्हें अब उजागर किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
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इसी बीच यह मामला अब न्यायिक स्तर तक भी पहुंच गया है। एक जनहित याचिका (PIL) झारखंड हाईकोर्ट में दायर की गई है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से विस्तृत जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कई जिलों में ट्रेजरी से यात्रा भत्ता (TA), महंगाई भत्ता (DA) और अन्य मदों के नाम पर फर्जी भुगतान कर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई।
याचिका में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के विपरीत अकाउंट सेक्शन में की गई, जिससे वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम देने में आसानी हुई। इसके अलावा हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जुड़े मामलों में भी जांच की मांग उठाई गई है, जहां कुछ कर्मचारियों पर वर्षों तक नियमों के खिलाफ वित्तीय कार्य संभालने का आरोप है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में फर्जी वेतन और भत्ते निकालने में तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका पाई गई है, जिन पर पहले से ही कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह गड़बड़ी कितने बड़े स्तर पर फैली हुई है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह ऑडिट ऐतिहासिक कदम साबित होगा, जिससे न केवल पुराने वित्तीय मामलों का खुलासा होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। सरकार ने दोहराया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी नीति शून्य सहनशीलता की है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि जांच के बाद और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे राज्य की वित्तीय प्रणाली में वर्षों से छिपी परतें उजागर होंगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
