मुंबई। डेटिंग ऐप के जरिए चल रहे एक सुनियोजित ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें युवकों को ‘डेट’ के बहाने बुलाकर उनसे हजारों रुपये वसूले जाते थे। साकीनाका इलाके के एक कैफे से संचालित इस गिरोह का भंडाफोड़ एक सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन के बाद हुआ, जिसने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।
मामला तब सामने आया जब एक सामाजिक संगठन से जुड़े व्यक्ति ने खुद को पीड़ित बनाकर इस गिरोह का पर्दाफाश करने की योजना बनाई। उसने एक डेटिंग ऐप के जरिए एक युवती से संपर्क किया। कुछ ही दिनों में बातचीत व्हाट्सऐप पर शिफ्ट हो गई और फिर साकीनाका के एक कैफे में मिलने का समय तय हुआ। जो एक सामान्य मुलाकात लग रही थी, वह दरअसल एक जाल साबित हुई।
घटनाक्रम के अनुसार, युवती उसे एक ऐसे कैफे में ले गई जहां कपल्स के लिए अलग सेक्शन बनाया गया था। बैठते ही युवती ने महंगे ड्रिंक्स और स्नैक्स ऑर्डर करने शुरू कर दिए। महज 40-45 मिनट में बिल करीब ₹18 हजार तक पहुंच गया। इसके बाद कैफे स्टाफ ने तत्काल भुगतान का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
हालांकि, जिस व्यक्ति को गिरोह शिकार समझ रहा था, वह पहले से तैयार डिकॉय था। जैसे ही स्थिति गंभीर हुई, पहले से मौजूद टीम ने मौके पर छापा मार दिया और कैफे में मौजूद कर्मचारियों व अन्य आरोपियों को पकड़ लिया। छापे के दौरान एक अन्य व्यक्ति भी मिला, जिससे इसी तरह का भारी-भरकम बिल जबरन वसूला जा रहा था, जिससे यह साफ हुआ कि यह ठगी एक तय पैटर्न पर चल रही थी।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन ड्रिंक्स के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही थी, वे असल में पानी थे। यानी ग्राहकों को नकली शराब परोसकर उनसे हजारों रुपये वसूले जा रहे थे। कैफे को इस तरह तैयार किया गया था कि वहां आने वाला व्यक्ति अलग-थलग पड़ जाए और दबाव में आकर भुगतान करने को मजबूर हो जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, यह रैकेट केवल एक कैफे तक सीमित नहीं था। इसमें कई लोग शामिल थे, जिनमें कैफे स्टाफ के अलावा बाहरी संचालक भी थे। युवतियों को दूसरे शहरों से लाकर इस काम में लगाया जाता था। उन्हें टारगेट से बातचीत करने और मुलाकात के दौरान कैसे व्यवहार करना है, इसकी पूरी ट्रेनिंग दी जाती थी। हर ‘डेट’ के बदले उन्हें तय रकम दी जाती थी।
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गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले डेटिंग या मैट्रिमोनियल साइट्स पर टारगेट चुना जाता, फिर बातचीत को जल्दी से निजी प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप पर ले जाया जाता ताकि रिकॉर्ड न रहे। इसके बाद तय जगह पर मुलाकात कराकर पूरी स्थिति को नियंत्रित किया जाता था।
आगे की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि शुरुआती बातचीत अक्सर गिरोह के पुरुष सदस्य ही महिला बनकर करते थे। जब मुलाकात तय हो जाती थी, तब असली युवती को भेजा जाता था, जिसे पहले से ही टारगेट की पूरी जानकारी दे दी जाती थी। इस वजह से पूरा प्लान बेहद विश्वसनीय और प्रभावी लगता था।
इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और डराने-धमकाने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। मोबाइल फोन और सीसीटीवी फुटेज जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर नेटवर्क के विस्तार का पता लगाया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया हो सकता है, लेकिन सामाजिक शर्म और झिझक के कारण बहुत कम लोग सामने आ रहे हैं।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिजिकल सेटअप को मिलाकर ठगी के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी मनोवैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं—जैसे भरोसा बनाना, जल्दबाजी पैदा करना और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाना।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि डेटिंग ऐप पर बातचीत करते समय सतर्क रहें, अनजान लोगों से जल्दी निजी प्लेटफॉर्म पर न जाएं और किसी भी संदिग्ध जगह पर मिलने से बचें।
