“विदेश से कंट्रोल, लोकल में ऑपरेशन—एक गिरा, दो गैंग अंडरग्राउंड; फर्जी GST और 78 खातों से घूम रहा काला पैसा”

“गेमिंग ऐप के नाम पर ₹100 करोड़ की ठगी: कानपुर बना साइबर सट्टेबाजी का हब, 3 ब्रांचों का खुलासा”

Roopa
By Roopa
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कानपुर। ऑनलाइन गेमिंग एप के नाम पर चल रहे बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए शहर में सक्रिय तीन ब्रांचों में से एक का पर्दाफाश हुआ है, जबकि दो अन्य अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। बर्रा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक ब्रांच से जुड़े आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों के न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि इससे पहले दो दिन का पुलिस रिमांड दिया गया था।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क विदेशी कंट्रोल से संचालित हो रहा था, जिसका मुख्य संचालन दुबई से किया जा रहा था। वहीं भारत में इसके एजेंट दिल्ली, नोएडा और हरियाणा में बैठकर कानपुर की ब्रांच 24, 25 और 26 को संचालित कर रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद ब्रांच 24 से जुड़े आरोपी पकड़े गए, लेकिन अन्य ब्रांचों के सदस्य मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं।

इस गिरोह ने लोटस 365, रेड्डी बुक, कार्तिकेय और दुबई EXH जैसे प्रतिबंधित गेमिंग प्लेटफॉर्म के क्लोन तैयार कर लोगों को अपने जाल में फंसाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए यूजर्स को गेमिंग आईडी के लिंक भेजे जाते थे। शुरुआत में लोगों को छोटे-छोटे मुनाफे का लालच देकर जोड़ा जाता, फिर धीरे-धीरे उनसे बड़ी रकम ठगी जाती थी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कैब में बैठकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके और वे लगातार स्थान बदलते रहें। इसी वजह से कैब चालकों और ऑटो ड्राइवरों से अपील की गई है कि यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी थाने को सूचना दें।

गिरोह का सबसे अहम तरीका फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल था। आरोपी नकली GST नंबर बनवाकर उसके आधार पर करंट अकाउंट खुलवाते थे। इन खातों के जरिए रोजाना लाखों रुपये का लेनदेन किया जाता था। इससे न सिर्फ पैसों का ट्रेल छिप जाता था, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए भी इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।

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साइबर सेल को अब तक इस गिरोह से जुड़े 78 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इन सभी खातों के खुलने से लेकर अब तक के लेनदेन का पूरा विवरण बैंकों से मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन में बैंक डिटेल मिलने के बाद नेटवर्क की पूरी परतें खुल सकती हैं और बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआती जांच में ही सामने आया है कि आरोपी अब तक ₹100 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं। इतना ही नहीं, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी गिरोह के अन्य सदस्यों ने एक ही दिन में एक खाते से करीब ₹50 लाख रुपये निकाल लिए। इससे साफ है कि नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और इसके अन्य सदस्य लगातार ठगी को अंजाम दे रहे हैं।

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्हें कॉल सेंटर में नौकरी देने के नाम पर इस नेटवर्क से जोड़ा गया था। शुरुआत में उन्हें साधारण काम दिया जाता, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें ठगी के पूरे सिस्टम में शामिल कर लिया जाता था। एक बार पैसा आने लगने के बाद युवक इस जाल से बाहर नहीं निकल पाते थे।

अब जांच एजेंसियों का फोकस दिल्ली, नोएडा और हरियाणा में बैठे मुख्य संचालकों और एजेंटों की गिरफ्तारी पर है। इसके लिए विशेष टीमें गठित कर जल्द ही रवाना करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस पूरे मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे गेमिंग फ्रॉड पूरी तरह से “सोशल इंजीनियरिंग” पर आधारित होते हैं। उनके मुताबिक, “गिरोह पहले भरोसा बनाते हैं, छोटे-छोटे मुनाफे दिखाकर यूजर्स को सिस्टम में फंसाते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाते हैं। फर्जी GST और मल्टीपल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर ये लोग ट्रांजेक्शन को लेयरिंग के जरिए छिपाते हैं, जिससे जांच एजेंसियों को ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक, गेमिंग ऑफर या तेजी से मुनाफा देने वाले प्लेटफॉर्म से दूर रहें।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के नाम पर चल रहे अवैध नेटवर्क किस तरह आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और साइबर अपराध का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

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