ठाणे के कल्याण में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, बुजुर्ग महिला से ₹73.30 लाख की ठगी, पुलिस जांच जारी

“5 दिन का डर, ₹73 लाख की चपत: बुजुर्ग महिला से ‘आतंकी लिंक’ का झांसा देकर साइबर ठगों ने खाली किया बैंक खाता”

Roopa
By Roopa
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डोंबिवली/ठाणे। महाराष्ट्र के कल्याण क्षेत्र में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला को “डिजिटल अरेस्ट” और कथित आतंकी कनेक्शन का डर दिखाकर पांच दिनों में ₹73.30 लाख की ठगी कर ली गई।

यह घटना 6 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच की बताई जा रही है। पीड़िता Kalyan क्षेत्र के मुरबाड रोड स्थित एक आवासीय सोसाइटी में रहती हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच अधिकारी बताकर महिला को फोन किया और दावा किया कि उनका मोबाइल नंबर एक आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। आरोपियों ने यह भी कहा कि उनका नंबर पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया गया है, जिससे महिला में भय और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

इसके बाद अगले कुछ दिनों में चार अन्य ठगों ने भी अलग-अलग कॉल कर खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। इन सभी ने लगातार महिला पर दबाव बनाया और उन्हें किसी से संपर्क करने या सलाह लेने से रोक दिया, जिससे वह मानसिक रूप से पूरी तरह घिर गईं।

ठगों ने व्हाट्सएप के माध्यम से कई बैंक खातों की जानकारी भेजी और “सत्यापन” के नाम पर RTGS व ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने के निर्देश दिए। लगातार डर और दबाव के चलते महिला ने पांच दिनों तक उनके निर्देशों का पालन किया।

इस दौरान अलग-अलग बैंक खातों में किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई गई और कुल मिलाकर ₹73.30 लाख की ठगी कर ली गई। बाद में जब महिला ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी, तब जाकर पूरा मामला सामने आया और ठगी का खुलासा हुआ।

इसके बाद शिकायत Thane के महात्मा फुले चौक पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को फर्जी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ऐंठ रहा है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी लगातार कॉल कर पीड़ित को मानसिक रूप से अलग-थलग कर देते हैं और झूठे कानूनी दबाव में फंसा देते हैं, जिससे व्यक्ति सोचने और किसी से सलाह लेने की स्थिति में नहीं रहता।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी या पुलिस विभाग फोन पर बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करने या व्यक्तिगत बैंक जानकारी साझा करने की मांग नहीं करता। ऐसा कोई भी कॉल पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत होता है।

फिलहाल पुलिस ठगों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक फैला हो सकता है।

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह डर, आतंक और कानून के नाम का इस्तेमाल कर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या “डिजिटल अरेस्ट” जैसी धमकी पर भरोसा न करें और तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अक्सर आधिकारिक भाषा और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर पीड़ित पर लगातार दबाव बनाते हैं, ताकि वह परिवार या दोस्तों से बात न कर सके।

वरिष्ठ नागरिक इस तरह के मामलों में अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे डिजिटल बैंकिंग और साइबर फ्रॉड के तरीकों से कम परिचित होते हैं, जिसका फायदा उठाकर ठग उन्हें आसानी से फंसा लेते हैं।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत बातचीत बंद कर देनी चाहिए और जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक स्रोतों या परिवार के माध्यम से करनी चाहिए। बैंक या सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन पर ओटीपी या पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करतीं।

यह घटना डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और जागरूकता की आवश्यकता को एक बार फिर गंभीर रूप से उजागर करती है।

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