मेरठ में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही निगरानी के बीच एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक चेकबुक बरामद की है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था।
सूत्रों के अनुसार इस अवैध धन को बाद में क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दिया जाता था, जिससे धन के स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क ने लगभग 100 बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया, जिन खातों में देश के अलग-अलग हिस्सों से शिकायतें दर्ज हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरबाज उर्फ सोनू, नवील अख्तर और हैदर के रूप में हुई है। ये तीनों लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे और पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल पाए गए हैं। उनका काम नए बैंक खाते उपलब्ध कराना और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करना बताया जा रहा है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो त्रिवेणी सिंह का कहना है कि ऐसे गिरोह डिजिटल लालच और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए आम लोगों को फंसाते हैं। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के माध्यम से पैसा विदेश भेजने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन चुकी है।
इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आम लोगों को छोटे-मोटे रोजगार या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते थे, जिन खातों को बाद में साइबर ठगी के लिए उपयोग किया जाता था। पीड़ित खाताधारक कई बार अनजाने में ही कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते थे, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता था।
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जांच में यह भी संकेत मिला है कि यह नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ था और इसके तार कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप से जुड़े हो सकते हैं। क्रिप्टो के माध्यम से धन के लेन-देन को ट्रेस करना बेहद कठिन होता है, इसी कारण ऐसे गिरोह इसका उपयोग लगातार बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल जागरूकता की कमी भी ऐसे अपराध बढ़ने का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि कई लोग आसान पैसे के लालच में अपनी व्यक्तिगत बैंक जानकारी साझा कर देते हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में वित्तीय ट्रैकिंग के जरिए पैसे के मूवमेंट को समझने की कोशिश कर रही है, ताकि ठगी के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।
साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस गिरोह का संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ है, जो भारत से बाहर बैठकर साइबर अपराध संचालित कर रहा हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, खासकर बैंक खाता खोलने और किसी भी प्रकार के कमीशन वाले ऑफर से बचने की अपील की गई है।
यह पूरा मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां पारंपरिक धोखाधड़ी की जगह अब डिजिटल माध्यम और क्रिप्टो तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
आगामी दिनों में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो एक्सचेंज डेटा का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। इस कार्रवाई को साइबर ठगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे अपराध नेटवर्क पर लगाम लगाने में मदद कर सकता है।
