सूरत। बीमा पॉलिसी पर बोनस और रिफंड का झांसा देकर ठगी करने का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूरत की 62 वर्षीय एक गृहिणी साइबर ठगों के जाल में फंसकर ₹11.03 लाख गंवा बैठीं। आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल कार्यालय और अन्य संस्थाओं का अधिकारी बताकर पहले भरोसा जीता और फिर सुनियोजित तरीके से पैसे ऐंठ लिए। मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने वर्ष 2018 में एक बीमा कंपनी की पॉलिसी ली थी, जिसके लिए वह हर महीने ₹10,943 का प्रीमियम भर रही थीं। यह पॉलिसी 10 साल की अवधि के लिए थी और सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था। लेकिन वर्ष 2021 में आया एक फोन कॉल इस पूरे मामले की शुरुआत बना।
फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को “बीमा लोकपाल कार्यालय, दिल्ली” से बताया और दावा किया कि महिला की पॉलिसी पर ₹1.75 लाख का बोनस लंबित है। उसने कहा कि इस बोनस को पाने के लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त पॉलिसियां खरीदनी होंगी। भरोसा मजबूत करने के लिए आरोपी ने उनकी पॉलिसी से जुड़ी कई सटीक जानकारियां साझा कीं, जिससे महिला को लगा कि कॉल पूरी तरह वास्तविक है।
इसके बाद आरोपी के कहने पर महिला ने एक सिंगल प्रीमियम स्कीम के तहत आठ नई पॉलिसियां ले लीं। कुछ ही दिनों में इन पॉलिसियों के दस्तावेज उनके घर पहुंचा दिए गए, जिससे उनका विश्वास और गहरा हो गया। हालांकि, जब तय समय तक बोनस की राशि उनके खाते में नहीं आई, तो उन्हें शक होने लगा।
संदेह होने पर उन्होंने बीमा नियामक संस्था से संपर्क किया, जहां से उन्हें आंशिक राहत मिली और तीन पॉलिसियों का पैसा वापस हो गया। लेकिन इसी बीच ठगों ने एक और चाल चली। 26 फरवरी को उन्हें फिर से एक कॉल आया।
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इस बार कॉल करने वाले ने खुद को “एक्जीक्यूटिव काउंसिल ऑफ इंश्योरेंस, हैदराबाद” से बताया और बाकी पॉलिसियों का रिफंड दिलाने का भरोसा दिया। उसने महिला से उनके बैंक खाते की जानकारी और पॉलिसी दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने प्रोसेसिंग फीस, टैक्स और अन्य चार्ज के नाम पर पैसे मांगने शुरू कर दिए।
पीड़िता ने 3 मार्च से 2 अप्रैल के बीच कुल 11 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹11.03 लाख ट्रांसफर कर दिए। हर बार उन्हें आश्वासन दिया गया कि जल्द ही उनका पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद ठगों ने आखिरी चाल चली।
आरोपियों ने महिला को ₹17.60 लाख का एक चेक भेजा, साथ ही एक आधिकारिक दिखने वाला पत्र भी दिया गया। लेकिन जब महिला ने यह चेक बैंक में जमा किया, तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपियों के मोबाइल फोन बंद हो गए और उनसे संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया।
ठगी का अहसास होते ही पीड़िता ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल किया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में “सोशल इंजीनियरिंग” तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इस संबंध में प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “अपराधी पहले पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए वास्तविक जानकारी और आधिकारिक भाषा का उपयोग करते हैं। इसके बाद वे बोनस या रिफंड का लालच देकर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाते हैं। फर्जी दस्तावेज, नकली कॉलर आईडी और प्रोफेशनल टोन इस ठगी को विश्वसनीय बना देते हैं।”
पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। खासकर बोनस या रिफंड के नाम पर मांगे जा रहे पैसे को लेकर सावधानी बरतें। किसी भी भुगतान से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि डिजिटल दौर में साइबर ठग लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है और उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
