शाहजहांपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चर्चित वृद्धावस्था पेंशन घोटाले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई और तेज कर दी है। मुख्य आरोपी और बर्खास्त जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को उसकी दो और लग्जरी गाड़ियों को सीज कर दिया गया, जिनकी कुल कीमत ₹15.50 लाख आंकी गई है। इससे पहले 4 अप्रैल को ₹2 करोड़ 53 लाख 85 हजार की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी। इस नई कार्रवाई के बाद कुल जब्ती का आंकड़ा अब लगभग ₹2.69 करोड़ तक पहुंच गया है।
यह कार्रवाई लखनऊ कमिश्नरेट और शाहजहांपुर पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है। मंगलवार को जिन दो वाहनों को कुर्क किया गया, उनमें ₹9.20 लाख कीमत की महिंद्रा एक्सयूवी-500 और ₹6.30 लाख कीमत की महिंद्रा बोलेरो शामिल हैं। इन वाहनों को आरोपी की संदिग्ध आय से खरीदा गया माना जा रहा है।
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इस पूरे घोटाले का खुलासा समाज कल्याण विभाग द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद हुआ था। वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी वंदना सिंह ने थाना सदर बाजार में तत्कालीन अधिकारी राजेश कुमार समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इन लोगों ने एक संगठित गिरोह बनाकर वृद्धावस्था पेंशन योजना में बड़े पैमाने पर धांधली की और सरकारी धन का गबन किया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने मिलकर लगभग ₹2 करोड़ 52 लाख 39 हजार की राशि का दुरुपयोग किया। यह घोटाला बुजुर्ग लाभार्थियों के बैंक खातों में हेरफेर कर अंजाम दिया गया। कई मामलों में फर्जी खातों का इस्तेमाल किया गया, जबकि कुछ मामलों में वास्तविक लाभार्थियों की जानकारी का दुरुपयोग कर उनके नाम पर पैसा निकाला गया। इस तरह योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन को siphon किया गया, जिससे योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि इस घोटाले का पर्दाफाश जुलाई 2023 में हुआ था, जब पेंशन वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। शुरुआती जांच में ही बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के संकेत मिले, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियों ने पाया कि यह कोई एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित गिरोह द्वारा संचालित आर्थिक अपराध था।
आरोपी राजेश कुमार मूल रूप से मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र के तुलसीपुर कुडवा गांव का निवासी बताया गया है। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है। हाल ही में विभागीय जांच के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जिससे उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी पूरी हो गई है।
जांच एजेंसियां अब आरोपी की अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। बैंक खातों, जमीन-जायदाद और अन्य निवेशों का विवरण खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जब्ती का दायरा आगे और बढ़ सकता है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस घोटाले में और किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसका नेटवर्क अन्य जिलों तक फैला हुआ है।
पुलिस का कहना है कि गबन की पूरी राशि की वसूली और सभी आरोपियों की पहचान होने तक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके अलावा, विभागीय स्तर पर भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
इस मामले में लगातार हो रही संपत्ति जब्ती यह दर्शाती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ अब सख्ती बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो न केवल प्रशासनिक जवाबदेही बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी व्यापक असर डाल सकते हैं
