मुंबई: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के एक अधीक्षक समेत तीन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि ₹15 लाख की रिश्वत लेकर एक विभागीय जांच को प्रभावित करने और दबाने की कोशिश की गई। यह मामला मुंबई में दर्ज किया गया है और इसमें भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश और रिश्वतखोरी के आरोप शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, आरोपी CGST अधीक्षक एम. शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी कंपनी के मालिक से ₹15 लाख की मांग की और उसे स्वीकार भी किया। इसके बदले में विभागीय जांच को या तो समाप्त करने या उसे कमजोर करने का आश्वासन दिया गया था। इस मामले में कंपनी के मालिक यू. कलशेट्टी और एक अन्य व्यक्ति के. को भी सह-आरोपी बनाया गया है, जिन पर इस कथित रिश्वत नेटवर्क में भूमिका निभाने का आरोप है।
यह मामला 10 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से दर्ज किया गया, जब प्रारंभिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि कथित रिश्वत का लेन-देन अगस्त 2025 में हुआ था। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को तब हुई जब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के पश्चिमी क्षेत्रीय विजिलेंस यूनिट द्वारा एक शिकायत आगे भेजी गई।
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शिकायत के मुताबिक, ठाणे के एक निवासी ने आरोप लगाया कि यह रिश्वत लेन-देन एक मध्यस्थ के जरिए हुआ, जो टैक्स अधिकारी और कंपनी मालिक के बीच संपर्क का काम कर रहा था। आरोप है कि यह भुगतान उस जांच को प्रभावित करने के लिए किया गया था जो संबंधित कंपनी के खिलाफ चल रही थी।
अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई हैं। ये सभी सबूत अब जांच का हिस्सा हैं और इनके आधार पर घटनाक्रम, पैसे के लेन-देन और आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह मामला केवल एक अलग घटना नहीं हो सकता, बल्कि CGST ठाणे ग्रामीण डिवीजन में भ्रष्टाचार के बड़े पैटर्न का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जानकारी में यह भी संकेत मिले हैं कि बदलापुर, अंबरनाथ, कल्याण और उल्हासनगर जैसे क्षेत्रों में कई ठेकेदारों और व्यवसायियों को भी इसी तरह के कथित नेटवर्क के जरिए प्रभावित किया गया हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ₹15 लाख की यह कथित राशि 2 अगस्त 2025 को दी गई थी। आरोप है कि यह रकम कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के दबाव को कम करने तथा कंपनी के खिलाफ चल रही जांच को हल्का करने के उद्देश्य से दी गई थी।
CBI ने मामले में आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही तलाशी अभियान, दस्तावेजों की जांच और आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। साथ ही बैंक लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जा रही है ताकि पैसे के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित लाभार्थियों का पता लगाया जा सके।
इस मामले ने कर प्रशासन प्रणाली में मौजूद संभावित कमजोरियों पर भी सवाल खड़े किए हैं, जहां कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ लेने की कोशिश कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने तथा डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है।
फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। संबंधित व्यक्तियों को कानून के तहत तब तक निर्दोष माना जाएगा जब तक अदालत में दोष सिद्ध न हो।
CBI ने कहा है कि जांच का मुख्य उद्देश्य पूरे भ्रष्टाचार नेटवर्क का खुलासा करना और इसमें शामिल सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करना है।
