हैदराबाद: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। जुबली हिल्स पुलिस ने ‘Trivial Chapter’ नामक ओवरसीज कंसल्टेंसी के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस गिरोह के फाउंडर, CEO और वीजा विभाग प्रमुख सहित आठ अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लंका निरुपमा (वाइस प्रेसिडेंट) और ममिडी अरुण राज (रीजनल मैनेजर) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे नौकरी के इच्छुक युवाओं को विदेश में आकर्षक रोजगार का झांसा देकर उनसे भारी रकम वसूलते थे और बदले में फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराते थे।
जांच अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को गुमराह कर पैसा ऐंठना था। आरोपियों ने पीड़ितों को ग्रीस, इटली और सर्बिया जैसे देशों में नौकरी दिलाने का वादा किया था। इसके लिए उनसे प्रोसेसिंग फीस, वीजा चार्ज और अन्य खर्चों के नाम पर बड़ी रकम ली गई।
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पुलिस के अनुसार, पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने नकली ‘वर्क ऑथराइजेशन लेटर’ और अन्य दस्तावेज तैयार किए, जो ऑनलाइन टेम्पलेट्स की मदद से बनाए गए थे। ये दस्तावेज देखने में असली लगते थे, जिससे कई लोग इस ठगी का शिकार हो गए।
जुबली हिल्स पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस रैकेट का संचालन एक संगठित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें अलग-अलग विभागों में लोगों को जिम्मेदारियां बांटी गई थीं। वीजा प्रोसेसिंग से लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने तक का पूरा सिस्टम बनाया गया था।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि गिरफ्तार दोनों कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे सीधे तौर पर ग्राहकों से संपर्क में रहते थे और उन्हें विदेश में नौकरी का झूठा भरोसा दिलाते थे। इसी भरोसे के आधार पर कई लोग आर्थिक रूप से नुकसान झेल चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि अब तक कई पीड़ितों से शिकायतें मिली हैं, जिनमें लाखों रुपये की ठगी का दावा किया गया है। जांच एजेंसियां अब बैंक लेन-देन, डिजिटल ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
इस मामले में पुलिस ने कहा कि गिरोह के आठ अन्य सदस्य, जिनमें कंपनी का फाउंडर, CEO और वीजा विभाग प्रमुख शामिल हैं, फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश में विशेष टीमें लगाई गई हैं और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर इस खुलासे के बाद नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं में चिंता का माहौल है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रैकेट अक्सर बेरोजगारी और विदेश जाने की इच्छा का फायदा उठाते हैं, इसलिए लोगों को किसी भी कंसल्टेंसी पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करनी चाहिए।
साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी वर्क परमिट और नकली ऑफर लेटर के जरिए चलने वाले ऐसे नेटवर्क तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता जरूरी है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है और उम्मीद है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
