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ट्रैफिक पुलिस की टेक्नोलॉजी स्ट्राइक: क्लोन नंबर प्लेट रैकेट का पर्दाफाश

Team The420
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हैदराबाद: हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस ने वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी एक गंभीर धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है, जिसमें एक ही नंबर प्लेट का इस्तेमाल दो अलग-अलग दोपहिया वाहनों पर किया जा रहा था ताकि ई-चालान और ट्रैफिक जुर्मानों से बचा जा सके। इस मामले में बोराबंडा क्षेत्र के एक निवासी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एक होंडा एक्टिवा स्कूटर पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी, जबकि वही रजिस्ट्रेशन नंबर उसकी बेटी के नाम पर पंजीकृत एक अन्य एक्टिवा का था। इस तरह एक ही वाहन पहचान को दो अलग-अलग स्कूटरों पर उपयोग कर ट्रैफिक प्रवर्तन प्रणाली को गुमराह करने की कोशिश की गई।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब ट्रैफिक विभाग की डिजिटल निगरानी के दौरान रिकॉर्ड में असामान्यता दर्ज की गई। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर अलग-अलग स्थानों पर लगभग एक ही समय में दिखाई देने लगा, जिसने अधिकारियों को संदेह में डाल दिया और तुरंत गहन जांच शुरू की गई।

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जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई। ANPR कैमरों ने अलग-अलग लोकेशन पर एक ही नंबर प्लेट को ट्रैक किया, जिससे यह साफ हो गया कि दो अलग-अलग वाहन एक ही पहचान का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने जानबूझकर दूसरी एक्टिवा पर डुप्लीकेट नंबर प्लेट लगाई थी ताकि कैमरा-आधारित ई-चालान और चालान प्रणाली से बचा जा सके। हालांकि यह तरीका देखने में सरल लगता है, लेकिन कानून की नजर में यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि असली रजिस्ट्रेशन नंबर आरोपी की बेटी के नाम पर दर्ज एक्टिवा का है, जो वेंगल राव नगर (एसआर नगर क्षेत्र) में पंजीकृत है। लेकिन उसी नंबर का अवैध रूप से दूसरी बाइक पर उपयोग कर वाहन की पहचान को पूरी तरह “क्लोन” कर दिया गया था।

ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल प्रवर्तन व्यवस्था को धोखा देकर जुर्माने से बचना होता है, लेकिन आधुनिक निगरानी तकनीक के कारण अब इस तरह की धोखाधड़ी ज्यादा समय तक छिप नहीं पाती।

इस मामले में बोराबंडा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपी को नोटिस जारी कर दिया गया है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले के खुलासे में ANPR सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो नंबर प्लेट को स्कैन कर केंद्रीय डेटाबेस से मिलान करता है। इसी तकनीक ने अलग-अलग स्थानों से एक ही नंबर को ट्रैक कर विसंगति पकड़ ली, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि नंबर प्लेट में छेड़छाड़ या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन का उपयोग एक गंभीर अपराध है, जिससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि दुर्घटना या अपराध की स्थिति में सही वाहन की पहचान भी मुश्किल हो जाती है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और आपराधिक कार्रवाई तक हो सकती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे वाहन पंजीकरण नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से दूर रहें।

हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस ने यह भी कहा कि शहर में डिजिटल निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत की जा रही है, जिससे नियमों से बच निकलना अब लगभग असंभव होता जा रहा है।

फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी से जुड़े अन्य वाहनों में भी इसी तरह की फर्जी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया है।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था कैसे ट्रैफिक सिस्टम को मजबूत बना रही है और नियम तोड़ने वालों के लिए बचना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

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