नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को 32nd Avenue Group से जुड़े एक बड़े कथित वित्तीय घोटाले के मामले में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और गोवा में कई ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा है, जिसमें समूह पर ₹500 करोड़ से अधिक के निवेशकों से जुड़ी धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने समूह से जुड़े सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई उन कई FIR और शिकायतों के आधार पर की गई है, जो निवेशकों ने दर्ज कराई थीं। आरोप है कि उन्हें रियल एस्टेट और अन्य परियोजनाओं में निवेश के नाम पर गुमराह किया गया और बाद में उनका पैसा या तो अटक गया या कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
निवेशकों की शिकायतों से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत तब हुई जब कई निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें 32nd Avenue Group से जुड़ी योजनाओं में निवेश के लिए आकर्षक रिटर्न और समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी का वादा किया गया था। लेकिन बाद में न तो तय समय पर प्रोजेक्ट पूरे हुए और न ही निवेशकों को अपेक्षित लाभ मिला।
इन शिकायतों के आधार पर अलग-अलग FIR दर्ज की गईं, जिसके बाद ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि पूरा मामला कई कंपनियों और लेन-देन की जटिल संरचना से जुड़ा हो सकता है।
NCR और गोवा में एक साथ छापेमारी
तलाशी अभियान के दौरान ED की टीमों ने दिल्ली-एनसीआर और गोवा में स्थित विभिन्न परिसरों की जांच की। अधिकारियों ने यहां से वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात और ट्रांजैक्शन से संबंधित डेटा जब्त किया।
जांच एजेंसियों को शक है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को कई स्तरों पर लेयरिंग (layering) के जरिए घुमाया गया हो सकता है, ताकि उसके असली स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस फंड का उपयोग रियल एस्टेट संपत्तियों या अन्य व्यावसायिक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया गया।
फंड ट्रेल और दस्तावेजों की जांच
ED के अधिकारियों के अनुसार, जांच का मुख्य फोकस फंड ट्रेल को ट्रैक करना है। इसके लिए डिजिटल उपकरणों, अकाउंटिंग रिकॉर्ड और कॉन्ट्रैक्ट दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या निवेश आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं की स्थिति और वित्तीय स्वास्थ्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। शुरुआती संकेतों के अनुसार, वादे किए गए प्रोजेक्ट डिलीवरी और वास्तविक वित्तीय उपयोग के बीच अंतर पाया गया है।
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बड़े स्तर पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप
32nd Avenue Group पर आरोप है कि उसने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के नाम पर निवेशकों से ₹500 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई। लेकिन इस धन का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल या डायवर्ट कर दिया गया।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या समूह की अलग-अलग इकाइयों का उपयोग फंड को घुमाने और असली लाभार्थियों को छिपाने के लिए किया गया था। ऐसे पैटर्न अक्सर बड़े आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में देखे जाते हैं।
आगे की कार्रवाई संभव
ED ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे और सख्त कार्रवाई संभव है। इसमें गिरफ्तारी, संपत्तियों की कुर्की और विस्तृत वित्तीय जांच शामिल हो सकती है, जो साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का सत्यापन किया जाएगा।
निवेश धोखाधड़ी पर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट और निवेश योजनाओं से जुड़े ऐसे मामलों में जटिल वित्तीय संरचना के कारण जांच और धन की वसूली दोनों चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
प्रशासन ने निवेशकों से अपील की है कि वे किसी भी उच्च रिटर्न वाले निवेश प्रस्ताव में पैसा लगाने से पहले कंपनी की विश्वसनीयता, नियामकीय स्थिति और ट्रैक रिकॉर्ड की पूरी जांच करें।
निष्कर्ष
32nd Avenue Group से जुड़े ₹500 करोड़ के कथित घोटाले में ED की यह कार्रवाई जांच में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, फंड डायवर्जन, संपत्ति निर्माण और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर और खुलासे होने की संभावना है। यह मामला एक बार फिर निवेश सुरक्षा और वित्तीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।
