कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के कथित मास्टरमाइंड फर्जी डॉक्टर रोहित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज कर दी है

कानपुर में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़, 12वीं पास युवक चला रहा था अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट

Team The420
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कानपुर (उत्तर प्रदेश): कानपुर में पुलिस ने एक चौंकाने वाले अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा किया है, जिसका संचालन कथित रूप से 12वीं पास एक युवक द्वारा किया जा रहा था, जो खुद को डॉक्टर बताकर लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे पूरे नेटवर्क को चला रहा था। इस मामले ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित अंग तस्करी गिरोह की आशंका को भी मजबूत कर दिया है।

मुख्य आरोपी, जिसकी पहचान रोहित (गाजियाबाद निवासी) के रूप में हुई है, को कई अवैध ट्रांसप्लांट मामलों से जुड़े होने के बाद गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया है कि वह बिना किसी मेडिकल डिग्री के खुद को प्रशिक्षित डॉक्टर बताकर अस्पतालों और ऑपरेशन थिएटरों तक पहुंच बना रहा था। पुलिस के अनुसार, वह अक्सर एप्रन और स्टेथोस्कोप पहनकर मेडिकल स्टाफ के बीच मौजूद रहता था ताकि लोगों को अपनी पहचान पर शक न हो।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई फोटो और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनमें आरोपी अस्पताल परिसर और ऑपरेशन थिएटर के भीतर दिखाई दे रहा है। कुछ तस्वीरों में वह ऐसे स्थानों पर भी मौजूद था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह अवैध सर्जरी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। इन तथ्यों ने सुरक्षा और मेडिकल सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह पूरा नेटवर्क अकेले नहीं चल रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इसमें कई अन्य सहयोगी शामिल थे, जो डोनर और मरीजों की व्यवस्था करते थे तथा अवैध ट्रांसप्लांट के लिए जगह और संसाधन उपलब्ध कराते थे। यह पूरा गिरोह बिना किसी वैध अनुमति के असंगठित या अवैध मेडिकल सेटअप में ऑपरेशन कराता था।

अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों के पास किसी भी प्रकार की मेडिकल ट्रेनिंग नहीं थी, फिर भी वे गंभीर सर्जिकल प्रक्रियाओं में शामिल थे। यह गिरोह धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और पैसों के लालच के जरिए अंग तस्करी का धंधा चला रहा था, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।

जांच में सामने आया है कि इस रैकेट से जुड़े कई मामलों में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि इसका मुख्य कारण अपर्याप्त मेडिकल ज्ञान, असुरक्षित ऑपरेशन प्रक्रिया और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की कमी रही है।

पुलिस ने अब तक इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लगभग 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि रोहित इस गिरोह का प्रमुख संचालक था, जो बिचौलियों के जरिए डोनर और रिसीवर को जोड़ने का काम करता था। ये बिचौलिए आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाते थे।

सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह केवल कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को डिजिटल कम्युनिकेशन और मोबाइल रिकॉर्ड से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।

इस मामले ने मेडिकल क्षेत्र में मौजूद गंभीर खामियों और अवैध अंग तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गिरोह उन लोगों का फायदा उठाते हैं जो इलाज के लिए मजबूर या आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी अस्पताल या क्लिनिक ने जानबूझकर या अनजाने में इस अवैध गतिविधि में सहयोग किया।

फिलहाल यह मामला लगातार विस्तार ले रहा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। यह केस हाल के वर्षों के सबसे गंभीर मेडिकल धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं

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