जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक बड़े मामले में निजी अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी ने हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि आरोपी ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत फर्जी और गढ़े हुए दस्तावेज जमा कर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला 29 सितंबर 2025 को दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ, जिसे जेतेन्द्र कुमार शर्मा ने स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि Mansarovar क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में उनकी मां के इलाज के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने इलाज के दौरान भारी नकद राशि वसूली, लेकिन न तो बिल दिए गए और न ही रसीदें उपलब्ध कराई गईं।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की हालत बिगड़ने की जानकारी समय पर परिवार को नहीं दी और बाद में अचानक मृत्यु की सूचना दी गई, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद परिजनों ने मेडिकल रिकॉर्ड और बिलिंग विवरण मांगा, लेकिन कथित तौर पर अस्पताल ने सहयोग नहीं किया।
FCRF Returns With CDPO, Its Premier Data Protection Certification for Privacy Professionals
मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान SMS अस्पताल के आठ डॉक्टरों की एक मेडिकल बोर्ड टीम बनाई गई, जिसने मरीज के उपचार रिकॉर्ड की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उपचार में किसी तरह की क्लिनिकल लापरवाही के प्रमाण नहीं मिले।
हालांकि, जांच में बड़ा खुलासा प्रशासनिक और दस्तावेजी अनियमितताओं को लेकर हुआ। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के रिकॉर्ड को कई बार “डिस्चार्ज” और “री-एडमिट” दिखाकर गलत तरीके से पोर्टल पर अपलोड किया। इसके अलावा कंसेंट फॉर्म में तारीखों में बदलाव और छेड़छाड़ के भी सबूत मिले।
फॉरेंसिक जांच में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद मामला और मजबूत हो गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत गलत वित्तीय लाभ लेने के उद्देश्य से किया गया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले में बिलिंग रिकॉर्ड में भी पारदर्शिता नहीं पाई गई और कई जरूरी दस्तावेज या तो गायब थे या फिर संशोधित रूप में पाए गए। इसके बाद अस्पताल संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद निजी अस्पताल संगठनों में नाराजगी देखने को मिली है। Private Hospitals and Nursing Homes Association के अध्यक्ष विजय कपूर ने इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई से निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर संकोच पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि अस्पताल से जुड़े मामलों की जांच के लिए पहले से निर्धारित SOP और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई मेडिकल लापरवाही के आधार पर नहीं बल्कि पूरी तरह से दस्तावेजी फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल हेल्थ स्कीम्स में सख्त निगरानी बेहद जरूरी है ताकि सरकारी फंड का दुरुपयोग रोका जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के बाद RGHS के तहत आने वाले अन्य अस्पतालों की भी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हो रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि डिजिटल हेल्थ पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले रिकॉर्ड की सत्यता और कंसेंट डॉक्यूमेंट्स की जांच प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बताया गया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को तनाव संबंधी स्वास्थ्य समस्या हुई, जिसके बाद उसे SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी ने कस्टडी के दौरान बेचैनी और स्वास्थ्य गिरावट की शिकायत की थी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
