मुंबई/नाशिक: महाराष्ट्र में कथित स्वयंभू बाबा अशोक खरात के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए राज्य के तीन प्रमुख शहरों में एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई नाशिक, पुणे और शिरडी में फैले कथित नेटवर्क पर केंद्रित है, जहां कुल 11 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस कार्रवाई से प्रशासनिक और धार्मिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
ED की यह छापेमारी उस गंभीर जांच का हिस्सा है, जिसमें अशोक खरात पर यौन शोषण, जबरन वसूली और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित वित्तीय और प्रभाव आधारित नेटवर्क की ओर संकेत करता है।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान नाशिक में 5, पुणे में 3 और शिरडी में 3 स्थानों को निशाना बनाया गया। इनमें आरोपी और उसके कथित सहयोगियों के आवासीय परिसर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कुछ सहकारी क्रेडिट सोसाइटीज शामिल हैं, जिन पर अवैध धन के लेन-देन और फर्जी निवेश चैनलों के उपयोग का संदेह है।
FCRF Returns With CDPO, Its Premier Data Protection Certification for Privacy Professionals
जांच में सामने आया है कि अशोक खरात खुद को एक आध्यात्मिक गुरु और “हीलर” के रूप में प्रस्तुत करता था। वह पूर्व में मर्चेंट नेवी से जुड़ा रहा है, लेकिन बाद में उसने धार्मिक छवि बनाकर अनुयायियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की। आरोप है कि इसी प्रभाव का उपयोग कर उसने लोगों को अपने प्रभाव में लिया और गंभीर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।
प्राथमिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी पर महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर या मानसिक नियंत्रण में लेकर यौन शोषण करने के आरोप हैं। एक शिकायत में यह दावा किया गया है कि एक पीड़िता के साथ तीन वर्षों तक लगातार दुष्कर्म किया गया। इसके अलावा, एक अन्य मामले में गर्भवती महिला को प्रताड़ित करने और गर्भपात के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
ED और पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी ने एक संगठित वित्तीय ढांचा तैयार कर रखा था, जिसमें बेनामी बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। ये खाते अन्य व्यक्तियों के नाम पर खोले जाते थे, जबकि उनका वास्तविक नियंत्रण आरोपी के पास ही रहता था। इन खातों को मोबाइल नंबरों के जरिए ऑपरेट किया जाता था ताकि असली लेन-देन छिपाया जा सके।
आरोप यह भी है कि वह अनुयायियों को “आशीर्वाद प्राप्त वस्तुएं” बेचकर उनसे भारी रकम वसूलता था। साधारण वस्तुओं को चमत्कारी या आध्यात्मिक शक्तियों से युक्त बताकर ऊंची कीमतों पर बेचा जाता था। इसके अलावा, जबरन वसूली के भी कई मामले जांच के दायरे में हैं, जिनमें अनुयायियों पर दबाव डालकर पैसे लेने के आरोप शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क से जुटाई गई अवैध धनराशि को आगे जमीन, संपत्ति और अन्य निवेश चैनलों में लगाया गया। इसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और कुछ पारिवारिक सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन पर धन को अलग-अलग माध्यमों में घुमाने का संदेह है।
नाशिक पुलिस द्वारा पहले से दर्ज मामले के बाद यह जांच लगातार विस्तार ले रही है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए पीड़ित सामने आ रहे हैं, जिससे आरोपों और संभावित रकम दोनों में बढ़ोतरी की आशंका है।
ED की यह कार्रवाई अब तक के सबसे गंभीर आध्यात्मिक और वित्तीय अपराध मामलों में से एक मानी जा रही है, जिसमें यौन शोषण, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित धोखाधड़ी के कई आयाम एक साथ सामने आए हैं। फिलहाल एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर होने की संभावना है।
