आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक चौंकाने वाला बैंकिंग अनियमितता का मामला सामने आया है, जहां एक दवा कारोबारी ने अपने ही बैंक खाते से लगातार हो रहे संदिग्ध लेन-देन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि उसके खाते से ऐसे ट्रांजेक्शन किए जा रहे हैं, जिनसे उसका कोई लेना-देना नहीं है। मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला सिकंदरा क्षेत्र का है, जहां निवासी जितेंद्र कुमार ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म “मैसर्स मैसीकल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से एक करंट अकाउंट एक्सिस बैंक की संजय प्लेस शाखा में संचालित है। यह खाता 21 नवंबर 2025 से संदिग्ध गतिविधियों का शिकार हो गया है।
पीड़ित के मुताबिक, खाते में लगातार ऐसे ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके खाते में न केवल अनजान स्रोतों से पैसे आ रहे हैं, बल्कि कई अज्ञात खातों में रकम ट्रांसफर भी की जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन लेन-देन के बारे में उन्हें कोई पूर्व सूचना या अनुमति नहीं दी गई।
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जितेंद्र कुमार का कहना है कि जब उन्हें इस गड़बड़ी का पता चला, तो उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक शाखा से संपर्क किया। हालांकि, उनके अनुसार बैंक की ओर से कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर पुलिस से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी शिकायत पुलिस आयुक्त को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी, लेकिन इसके बावजूद मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। लगातार अनदेखी और बढ़ती आर्थिक क्षति से परेशान होकर आखिरकार उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने और जांच शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद जगदीशपुरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
प्राथमिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि यह मामला साइबर फ्रॉड या बैंकिंग सिस्टम में किसी तकनीकी सेंध का हो सकता है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी खाते में बिना अनुमति के लगातार ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, तो यह या तो अकाउंट हैकिंग का मामला हो सकता है या फिर किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क की गतिविधि का हिस्सा भी हो सकता है।
फिलहाल, पुलिस बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल डेटा को खंगाल रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष के पास तो नहीं पहुंची या फिर किसी इनसाइडर की भूमिका तो नहीं है।
पीड़ित का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लगातार हो रहे संदिग्ध लेन-देन के कारण न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यदि किसी भी तरह की लापरवाही या आपराधिक साजिश सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
