गोरखपुर में फर्जी दुल्हन और नकली पुलिस बनकर उगाही करने वाले गिरोह के खुलासे के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई का प्रतीकात्मक दृश्य।

‘शादी का जाल, पुलिस की चाल’: फर्जी दुल्हन रैकेट में 7 गिरफ्तार

Team The420
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक संगठित अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो शादी के नाम पर लोगों को फंसाकर पहले फर्जी विवाह कराता था और फिर खुद को पुलिस बताकर उन्हें बंधक बनाकर रकम वसूलता था। चिलुआताल क्षेत्र में पुलिस की कार्रवाई में इस गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य लुटेरी दुल्हन और उसकी एक सहयोगी महिला अभी फरार हैं।

पूरा मामला राजस्थान के कोटा निवासी एक परिवार से जुड़ा है, जिसे शादी तय होने के नाम पर गोरखपुर बुलाया गया था। परिवार को यह भरोसा दिलाया गया कि रिश्ता पूरी तरह फाइनल हो चुका है और केवल औपचारिक विवाह समारोह कराना है। इसी विश्वास के साथ पीड़ित परिवार 12 मार्च को गोरखपुर पहुंचा, जहां पहले से पूरी साजिश रची जा चुकी थी।

जांच में सामने आया कि गिरोह ने पहले से फर्जी दुल्हन, नकली रिश्तेदार और पूरा सेटअप तैयार कर रखा था। परिवार को किसी तरह का शक न हो, इसके लिए बाकायदा जयमाल की रस्म भी कराई गई। विवाह की प्रक्रिया जैसे ही आगे बढ़ी, अचानक गिरोह के सदस्य सक्रिय हो गए और खुद को पुलिसकर्मी बताकर मौके पर पहुंच गए।

आरोप है कि आरोपियों ने नकली वर्दी और फर्जी पहचान पत्र दिखाकर पूरे परिवार को घेर लिया और यह आरोप लगाया कि अवैध तरीके से शादी कराई गई है। इसके बाद परिवार को डराकर बंधक बना लिया गया और उनसे ₹3 लाख की मांग की गई। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा और जेल भेज दिया जाएगा।

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डर और दबाव के चलते पीड़ित परिवार ने किसी तरह रकम जुटाकर आरोपियों को सौंप दी। पैसे मिलते ही सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद परिवार ने राजस्थान में जीरो एफआईआर दर्ज कराई, जिसे बाद में गोरखपुर पुलिस को ट्रांसफर किया गया।

तकनीकी जांच, सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने चिलुआताल इलाके में दबिश दी और सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना अंकुर सिंह, राजू शर्मा, धीरेंद्र यादव उर्फ टुनटुन, रवि चौधरी, मुन्ना जायसवाल, नवमी शर्मा और शैला देवी शामिल हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अंकुर सिंह एक हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध जैसे कई गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पूरा नेटवर्क उसी के नेतृत्व में संचालित हो रहा था।

जांच अधिकारियों के अनुसार, अंकुर सिंह खुद को दरोगा बताकर पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करता था, जबकि अन्य आरोपी सिपाही और पुलिसकर्मी बनकर पीड़ितों को डराते थे। नकली वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड और संगठित प्लानिंग इस गिरोह की सबसे बड़ी पहचान थी।

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी दुल्हन और उसकी सहयोगी महिलाओं को पहले से तैयार किया जाता था और उन्हें रिश्तेदारों के रूप में पेश किया जाता था, ताकि किसी को शक न हो। शादी के बाद अचानक माहौल बदलकर डर और धमकी का खेल शुरू हो जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹1.66 लाख नकद, दो फर्जी पुलिस पहचान पत्र और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। अब पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान में जुटी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले सामाजिक इंजीनियरिंग और भावनात्मक धोखे का उपयोग करके किए जाते हैं, जहां शादी जैसे पवित्र अवसर को अपराध का माध्यम बना दिया जाता है।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे जल्द सामने आ सकते हैं

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