ईमेल और मैसेज के जरिए भेजे जा रहे फर्जी चेतावनी संदेश; लिंक पर क्लिक करते ही ठग हासिल कर लेते हैं निजी और वित्तीय जानकारी

डिजिटल जंग तेज: भारत पर 4.7 करोड़ साइबर हमले नाकाम, रोजाना करीब 1 लाख 30 हजार वेब खतरे दर्ज

Team The420
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भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर अपराध का खतरा लगातार बढ़ रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी कास्परस्की की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में उसके सुरक्षा सिस्टम ने भारत में लगभग 4 करोड़ 70 लाख ऑनलाइन साइबर खतरों को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया।

रिपोर्ट बताती है कि देश के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को औसतन हर दिन करीब 1 लाख 30 हजार वेब आधारित साइबर खतरों का सामना करना पड़ा। इन हमलों में मुख्य रूप से फिशिंग, मालवेयर, संदिग्ध वेबसाइट और ऑनलाइन ठगी शामिल रहे। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।

2025 में लाखों साइबर हमले रोके गए

कास्परस्की की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच उसके सुरक्षा उत्पादों ने भारत में कंप्यूटर और नेटवर्क सिस्टम पर आने वाले 4 करोड़ 75 लाख से अधिक इंटरनेट आधारित खतरों का पता लगाकर उन्हें ब्लॉक किया।

इस अवधि में देश के करीब 24.7 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता किसी न किसी रूप में ऑनलाइन खतरों के संपर्क में आए। सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के मुताबिक वेब आधारित साइबर खतरों से प्रभावित उपयोगकर्ताओं के मामले में भारत दुनिया में 62वें स्थान पर रहा।

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क्यूआर कोड बन रहा ठगी का नया हथियार

कास्परस्की इंडिया के प्रमुख जयदीप सिंह के अनुसार साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। हाल के समय में फिशिंग लिंक छिपाने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग बढ़ा है।

मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन करते ही उपयोगकर्ता फर्जी वेबसाइट पर पहुंच सकते हैं, जहां बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है।

‘फाइललेस मैलवेयर’ बना बड़ा साइबर खतरा

रिपोर्ट में बताया गया कि ब्राउजर आधारित साइबर हमले अभी भी सबसे सामान्य तरीके बने हुए हैं। हमलावर ब्राउजर और उसके प्लग-इन की कमजोरियों का फायदा उठाकर सिस्टम में घुसपैठ की कोशिश करते हैं।

कास्परस्की के मुताबिक ‘फाइललेस मैलवेयर’ भी 2025 में एक गंभीर साइबर खतरे के रूप में उभरा। यह मैलवेयर कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में फाइल के रूप में मौजूद नहीं रहता, बल्कि सिस्टम की मेमोरी में छिपकर काम करता है, जिससे पारंपरिक एंटीवायरस इसे पहचानने में कठिनाई महसूस करते हैं।

डिजिटल विस्तार के साथ साइबर जोखिम बढ़ा

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ, पूर्व आईपीएस अधिकारी और प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अनजान लिंक, संदिग्ध क्यूआर कोड या फर्जी वेबसाइट पर अपनी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।”

सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि इंटरनेट उपयोगकर्ता मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें, सुरक्षित वेबसाइट ही खोलें और ऑनलाइन गतिविधियों में सतर्कता बरतें।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर खतरों की संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए सरकार, संस्थानों और आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।

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