डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक युवक को चंडीगढ़ पुलिस ने आजमगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर आरोप है कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर एक कारोबारी से ₹38 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए थे। अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को 10 मार्च तक ट्रांजिट रिमांड पर चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दिया है।
मामला चंडीगढ़ के साइबर थाने में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 7 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ के एक कारोबारी के मोबाइल पर फोन कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताते हुए दावा किया कि कारोबारी के आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में किया गया है और इसकी जांच मुंबई में चल रही है।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर रचा साइबर जाल
कॉल करने वाले व्यक्ति ने पीड़ित कारोबारी को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। बताया गया कि यदि मामले में सहयोग नहीं किया गया तो तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है। इस भय के माहौल में कारोबारी को लगातार फोन और ऑनलाइन माध्यम से निर्देश दिए गए।
जांच में सामने आया कि इसी दौरान आरोपी ने पीड़ित को कथित जांच प्रक्रिया का हवाला देकर अलग-अलग चरणों में ₹38 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। बाद में जब कारोबारी को पूरे मामले में धोखाधड़ी का संदेह हुआ तो उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
तकनीकी जांच में सामने आया आरोपी का सुराग
मामले की जांच के दौरान साइबर पुलिस ने कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच टीम को पता चला कि इस साइबर ठगी में आजमगढ़ शहर के कुर्मी टोला निवासी स्पर्श सिंह की भूमिका सामने आ रही है।
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस की टीम आजमगढ़ पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने मंजूर किया ट्रांजिट रिमांड
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां चंडीगढ़ पुलिस ने उसे पूछताछ और आगे की जांच के लिए ट्रांजिट रिमांड पर लेने की मांग की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के अनुरोध को स्वीकार करते हुए आरोपी को शनिवार शाम पांच बजे से 10 मार्च की शाम पांच बजे तक के लिए ट्रांजिट रिमांड पर चंडीगढ़ पुलिस को सौंपने का आदेश दिया।
अब चंडीगढ़ पुलिस आरोपी को अपने साथ ले जाकर विस्तृत पूछताछ करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साइबर ठगी गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का नया तरीका
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार हाल के समय में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस तरीके में ठग खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन कॉल पर डराते हैं और कहते हैं कि वे किसी आपराधिक मामले में फंस चुके हैं।
इस दौरान पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वह तुरंत “जांच” में सहयोग नहीं करेगा तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसी डर का फायदा उठाकर ठग पीड़ित से बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करा लेते हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेते हैं। वे पहले पीड़ित को मानसिक दबाव में डालते हैं और फिर उसे तत्काल पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत स्थानीय साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अज्ञात कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार के डर या दबाव में आकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं करना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
