UPI, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड और मोबाइल ट्रांजैक्शन पर कड़ी निगरानी; फ्रॉड होने पर ग्राहकों को मिल सकती है ₹25,000 तक मुआवजा सुविधा

डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी पर RBI का बड़ा कदम: 1 जुलाई 2026 से नए सुरक्षा नियम लागू करने की तैयारी

Team The420
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डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। ‘रेस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ फ्रेमवर्क के तहत प्रस्तावित तीसरे संशोधन दिशा-निर्देश 2026 के अनुसार डिजिटल वित्तीय लेनदेन में सुरक्षा उपायों को और सख्त किया जाएगा। यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू करने की योजना है।

नए नियमों का दायरा: UPI से ATM तक सभी ट्रांजैक्शन शामिल

आरबीआई की ओर से जारी ड्राफ्ट में इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड भुगतान, ATM लेनदेन और UPI भुगतान जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर को शामिल किया गया है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य ग्राहकों को साइबर फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजैक्शन से बचाना है।

प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्राहकों को सलाह दी जाएगी कि अगर उनके खाते से कोई संदिग्ध या धोखाधड़ी वाला इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन होता है तो वे तुरंत अपने बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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अधिकृत vs अनधिकृत ट्रांजैक्शन: RBI की स्पष्ट परिभाषा

नए नियमों में ‘अधिकृत’ और ‘अनधिकृत’ डिजिटल ट्रांजैक्शन की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है। आरबीआई के अनुसार अगर ग्राहक द्वारा OTP, PIN, पासवर्ड या कार्ड विवरण जैसी प्रमाणीकरण प्रक्रिया का उपयोग करके लेनदेन किया गया है तो उसे अधिकृत माना जाएगा। हालांकि अगर किसी ग्राहक को धोखे में रखकर या दबाव बनाकर पैसा ट्रांसफर कराया जाता है तो ऐसे लेनदेन को फ्रॉड श्रेणी में रखा जाएगा।

ड्राफ्ट में यह भी बताया गया है कि यदि किसी तीसरे पक्ष द्वारा ग्राहक की गोपनीय जानकारी चुराकर लेनदेन किया जाता है, या भुगतान प्रणाली के मध्यस्थ संस्थानों में सुरक्षा खामी के कारण धोखाधड़ी होती है, तो इसे सिस्टम-स्तरीय विफलता माना जाएगा। ऐसे मामलों में बैंक, टेलीकॉम सेवा प्रदाता या भुगतान गेटवे जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

फ्रॉड मुआवजा योजना: ₹25,000 तक राहत, लेकिन शर्तें लागू

आरबीआई ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड मामलों में मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए। यदि किसी ग्राहक को अधिकतम ₹50,000 तक का नुकसान होता है और वह घटना को समय पर रिपोर्ट करता है, तो उसे शुद्ध नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम ₹25,000 तक मुआवजा मिल सकता है। यह सुविधा ग्राहक के जीवनकाल में केवल एक बार उपलब्ध होगी। मुआवजे के लिए शर्त रखी गई है कि ग्राहक को पांच दिनों के भीतर बैंक और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी होगी। अगर बाद में धन की वसूली हो जाती है तो मुआवजे की राशि पुनः समायोजित की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था छोटे निवेशकों और सामान्य बैंक ग्राहकों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक लापरवाही के मामलों में मुआवजा सीमित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर पासवर्ड, OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल्स दूसरों के साथ साझा करना, संदिग्ध एप डाउनलोड करना या फ्रॉड अलर्ट को नजरअंदाज करना ग्राहक की लापरवाही माना जा सकता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। इसलिए बैंकिंग प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा, फ्रॉड मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना जरूरी हो गया है।

आरबीआई अधिकारियों के अनुसार ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। अंतिम नियम लागू करने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नए नियम डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में भरोसा बढ़ाने में मदद करेंगे।

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