ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर जालसाजों ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को निशाना बनाकर 83.3 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामला शहर के सिंगनल्लूर क्षेत्र का है, जहां रहने वाले थंगबलु सक्थिवेल को व्हाट्सएप के जरिए निवेश का लालच देकर फर्जी प्लेटफॉर्म पर पैसे लगवाए गए। पुलिस के अनुसार ठगों ने खुद को सेबी-रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर बताकर भरोसा जीतने की कोशिश की और धीरे-धीरे मोटी रकम ट्रांसफर कराई। पीड़ित ने जब मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
ठगी की शुरुआत और व्हाट्सएप ग्रुप
जानकारी के मुताबिक 40 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर थंगबलु सक्थिवेल को नवंबर 2025 में ऑनलाइन ट्रेडिंग विज्ञापन दिखा। विज्ञापन में आकर्षक रिटर्न का वादा किया गया था। संपर्क करने के बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जिसका नाम ‘A1 वेल्थ रिसर्च इंस्टिट्यूट’ रखा गया था।
ग्रुप में मौजूद कथित निवेश विशेषज्ञ खुद को वैध स्टॉकब्रोकर बताते हुए लगातार बाजार टिप्स और निवेश सलाह देने लगे। जांच में सामने आया कि जालसाजों ने पीड़ित से निवेश शुरू करने से पहले एक वेबसाइट मब्रुकफ.इन पर अकाउंट खुलवाया।
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फर्जी प्लेटफॉर्म पर चरणबद्ध ठगी
इसके बाद उन्हें निर्देश दिया गया कि विशेष कंपनियों के शेयर खरीदे जाएं। शुरुआती दौर में डिजिटल वॉलेट में दिख रहे बैलेंस में मुनाफा बढ़ता नजर आया, जिससे पीड़ित का भरोसा मजबूत होता गया। इसी विश्वास का फायदा उठाकर ठगों ने अलग-अलग चरणों में अधिक निवेश कराने का दबाव बनाया।
पुलिस के अनुसार 17 नवंबर 2025 से 12 फरवरी 2026 के बीच पीड़ित ने कुल 83.3 लाख रुपये ट्रांसफर किए। ठगों ने हर बार यह दावा किया कि निवेश की गई राशि सुरक्षित है और मुनाफा जल्द निकालने की सुविधा मिलेगी।
शिकायत और पुलिस जांच
पीड़ित ने 13 फरवरी 2026 को शहर की साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से साइबर अपराध को अंजाम दिया।
शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह संगठित तरीके से निवेशकों को फंसाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस अब उस वेबसाइट, बैंक खातों और व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
विशेषज्ञ सलाह और सावधानियां
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जालसाज पहले छोटे लाभ दिखाकर विश्वास बनाते हैं और फिर बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। “साइबर अपराधी अक्सर डिजिटल ट्रेडिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को लालच देकर फंसाते हैं,” एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा।
उनका कहना है कि बिना सत्यापन वाले निवेश प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप आधारित ट्रेडिंग सलाह से बचना चाहिए। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि ऑनलाइन निवेश से पहले कंपनी और प्लेटफॉर्म की पूरी जानकारी सत्यापित करनी चाहिए। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
