रितु देवी अपहरण मामला CBI जांच

रितु देवी रहस्य बरकरार: छह साल की तलाश के बाद क्लोजर रिपोर्ट, तीन आरोपी सलाखों के पीछे

Team The420
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फतेहपुर/कानपुर। छह वर्ष पहले लापता हुई रितु देवी का मामला अब कानूनी रूप से अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ता दिख रहा है। लंबी और बहुस्तरीय जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे जांच की दिशा में कोई ठोस संभावना शेष नहीं है। इसके साथ ही, मामले में नामजद तीनों आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में हैं और उनके खिलाफ लंबित आरोपों पर सुनवाई जारी है।

23 फरवरी 2021 को लापता

मामला कल्याणपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली अनुसूचित जाति की 22 वर्षीय रितु देवी से जुड़ा है। उसकी शादी कानपुर देहात के साढ़ क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि 23 फरवरी 2021 को मायके से हैप्पी सिंह और उसके सहयोगी उसे अपने साथ ले गए, जिसके बाद से वह घर नहीं लौटी। परिवार की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत के निर्देश पर 10 दिसंबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज की गई और औपचारिक जांच शुरू हुई।

गुजरात से तीन राज्यों तक जांच

प्रारंभिक जांच में रितु की अंतिम लोकेशन गुजरात के सूरत में ट्रेस हुई थी। इसके बाद जांच का दायरा उत्तर प्रदेश से बाहर बढ़ाया गया। स्थानीय स्तर पर पूछताछ और डिजिटल विश्लेषण के बाद विशेष जांच दल गठित किया गया। महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार तक टीमों ने दबिश दी। करीब 200 मोबाइल नंबरों का कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाला गया। संदिग्ध संपर्कों, ठिकानों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई, लेकिन कोई निर्णायक साक्ष्य सामने नहीं आया।

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हाईकोर्ट निगरानी में CBI जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट तलब की। लगातार निगरानी के बीच फरवरी 2024 में जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। एजेंसी ने युवती की जानकारी देने पर ₹3 लाख का इनाम घोषित किया। मुंबई और गुजरात के विभिन्न इलाकों में पोस्टर चस्पा किए गए। आधार से जुड़े मोबाइल कनेक्शनों की जांच की गई और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के डेटा का मिलान कराया गया। टेलीकॉम कंपनियों से आधार आधारित सिम कार्ड का ब्योरा भी जुटाया गया, पर कोई ठोस कड़ी हाथ नहीं लगी।

भाभी का नार्को टेस्ट

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि रितु देवी अपनी भाभी के मोबाइल से हैप्पी सिंह से बातचीत करती थी। इसी कड़ी में 28 नवंबर 2025 को भाभी का नार्को टेस्ट भी कराया गया। रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि एक कथित कॉल में रितु ने कहा था कि वह अपने गांव, परिवार या पति के पास वापस नहीं लौटेगी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

तीन आरोपी न्यायिक हिरासत में

एजेंसी ने अपने करीब आठ पन्नों के निष्कर्ष में 30 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए अदालत को बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि युवती संभवतः स्वेच्छा से गई थी। उसके जीवित या मृत होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला। इसी आधार पर हाईकोर्ट और संबंधित जिला न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। मामले में नामजद आरोपी हैप्पी सिंह, राही सिंह और संजय सिंह के खिलाफ अपहरण और संरक्षण से जुड़े आरोप लंबित हैं। तीनों वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत अब क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्तियां आमंत्रित करेगी और उसके बाद आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

रहस्य बरकरार, परिवार की उम्मीद

छह वर्षों की पड़ताल, तकनीकी विश्लेषण और राज्यों की सीमाएं पार करती खोजबीन के बावजूद रितु देवी का कोई ठोस सुराग न मिल पाना कई सवाल छोड़ गया है। परिवार अब भी उम्मीद लगाए बैठा है कि किसी दिन कोई कड़ी सामने आएगी। फिलहाल, अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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