कानपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी और उनकी पत्नी से ₹57 लाख की ठगी का मामला सामने आया, जिसमें CISF जवान को मास्टरमाइंड बताया गया।

‘डिजिटल अरेस्ट’ और फर्जी ट्रेडिंग ऐप का जाल: कोयंबटूर में साइबर ठगों ने उड़ा दिए ₹1 करोड़ से ज्यादा

Team The420
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तमिलनाडु के औद्योगिक शहर कोयंबटूर में साइबर ठगी के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों से कुल मिलाकर ₹1 करोड़ से अधिक की रकम उड़ा ली गई। मामलों की गंभीरता को देखते हुए Tamil Nadu Police ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठगी के तरीकों में “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी, फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर निवेश का झांसा शामिल है।

सबसे पहले मामला सिंगनल्लूर इलाके की एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी का सामने आया, जिन्हें ₹19 लाख का नुकसान हुआ। 13 जनवरी को उन्हें एक अनजान व्यक्ति का वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनका नाम किसी निजी एयरलाइन के सीईओ से जुड़े 206 मामलों वाले घोटाले में सामने आया है। खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताकर आरोपियों ने “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी और बैंक खातों की जांच के नाम पर उनसे अकाउंट डिटेल्स और पासवर्ड साझा करवाए। कुछ ही समय में उनके खाते से ₹19 लाख निकाल लिए गए। शिकायत के बाद पहले सीएसआर दर्ज हुआ और अब औपचारिक एफआईआर की गई है।

डॉ. रंगराज को 31 लाख का चूना

दूसरा मामला चेत्ती वीधी के 80 वर्षीय चिकित्सक डॉ. रंगराज से जुड़ा है, जिन्हें इसी तरह के “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ₹31.54 लाख की चपत लगी। जनवरी में उन्हें फोन कर बताया गया कि उनका नाम एक बड़े घोटाले में शामिल है और तत्काल गिरफ्तारी से बचने के लिए निर्देशों का पालन करना होगा। दबाव और भय का माहौल बनाकर आरोपियों ने उनसे कई किस्तों में रकम ट्रांसफर करवा ली।

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फर्जी ट्रेडिंग ऐप से 47 लाख का नुकसान

तीसरा मामला पोडानूर के 63 वर्षीय रिटायर्ड प्राइवेट बैंक कर्मचारी विजयगोपाल का है, जो स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी का शिकार हुए। उन्हें दो व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिये मोटा मुनाफा कमाने के दावे किए गए। निर्देशानुसार उन्होंने ‘Pollen’ और ‘Mibafss’ नामक मोबाइल ऐप डाउनलोड किए। डिजिटल वॉलेट में ₹1 करोड़ से अधिक का मुनाफा दिखाया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ा। लेकिन जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो ऐप फर्जी निकले और ₹47.10 लाख की राशि डूब गई।

पार्ट-टाइम जॉब के बहाने ठगी

इसी तरह कोवाइपुदुर की 29 वर्षीय मरियम्मल पार्ट-टाइम नौकरी की तलाश में ठगी का शिकार हो गईं। दिसंबर में उन्हें टेलीग्राम पर संपर्क किया गया और यूट्यूब वीडियो रिव्यू के बदले छोटी-छोटी रकम दी गई। बाद में “इन्वेस्टमेंट टास्क” के नाम पर बड़ी राशि लगाने के लिए दबाव बनाया गया। पैसे ट्रांसफर करते ही संपर्क टूट गया और ₹6.89 लाख का नुकसान हो गया।

ओंडीपुदुर की 35 वर्षीय पूर्व आईटी प्रोफेशनल राधा भारती के साथ भी लगभग यही पैटर्न दोहराया गया। पार्ट-टाइम काम के बहाने टेलीग्राम पर जोड़ा गया, यूट्यूब रिव्यू टास्क दिए गए और फिर निवेश के लिए उकसाया गया। इस प्रक्रिया में उन्होंने ₹10.52 लाख गंवा दिए।

साइबर ठगों की नई रणनीति

लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह संकेत दिया है कि साइबर अपराधी अब रिटायर्ड पेशेवरों, वरिष्ठ नागरिकों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को खास तौर पर निशाना बना रहे हैं। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर डर का माहौल बनाया जाता है, जबकि फर्जी ऐप और ग्रुप के जरिए झूठा मुनाफा दिखाकर लालच पैदा किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा न करें। किसी भी निवेश ऐप की प्रामाणिकता आधिकारिक वेबसाइट से जांचें और केवल सत्यापित प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

कोयंबटूर के ये मामले साफ बताते हैं कि डिजिटल दुनिया में जरा-सी चूक भारी पड़ सकती है। जांच एजेंसियां आरोपियों की पहचान और रकम की ट्रेसिंग में जुटी हैं, जबकि पीड़ित न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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