गोवा में साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रणनीति का असर दिखने लगा है। जनवरी-फरवरी 2026 की अवधि में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुल रिपोर्टेड ठगी राशि में 30% की कमी दर्ज की गई है। फरवरी माह में पीड़ितों से ठगी गई रकम का 43% हिस्सा फ्रीज करने में सफलता मिली। यह जानकारी गोवा पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने साझा की है।
जीरो ई-एफआईआर का कमाल
साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए Goa Police ने ‘जीरो ई-एफआईआर’ दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक, एक रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामलों में तुरंत ई-एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिससे अदालतों के समक्ष शीघ्र आवेदन देकर पीड़ितों की राशि बहाल कराने की प्रक्रिया तेज हुई है। इस साल अब तक ₹3.6 करोड़ की राशि फ्रीज की जा चुकी है।
1930 हेल्पलाइन की प्रभावशीलता
साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही मनी ट्रेल का विश्लेषण कर संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों के नोडल अधिकारियों से तत्काल समन्वय किया जाता है। क्लाउड-आधारित 1930 कॉल सेंटर में प्राप्त हर कॉल की वरिष्ठ अधिकारी निगरानी करते हैं, जिससे पीड़ितों को त्वरित और संवेदनशील सहायता मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, जागरूकता बढ़ने के कारण अब नागरिक तुरंत 1930 पर संपर्क कर रहे हैं, जिससे ठगी की रकम फ्रीज होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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आम ठगी के तरीके बरकरार
हालांकि निवेश के नाम पर व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर ऊंचे रिटर्न का लालच देना अब भी आम तरीका बना हुआ है। वाहन चालान के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल हैक करना और “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर रकम ऐंठना भी जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने या apk फाइल डाउनलोड करने से पहले सतर्कता बरतना जरूरी है।
हालिया गिरफ्तारियां
पिछले सप्ताह साइबर क्राइम सेल ने दो अलग-अलग मामलों में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। Manojbhai Bhimbhai Vasava (40) को गुजरात के भरूच से पकड़ा गया। उस पर ₹7.7 लाख की साइबर ठगी का आरोप है। शिकायत के अनुसार, उसने फर्जी बैंक संदेश में apk फाइल भेजी, जिसे इंस्टॉल करते ही पीड़ित का फोन लॉक हो गया और खाते से ₹7.7 लाख की अनधिकृत निकासी कर ली गई। दूसरे मामले में Mohan Kalve को हुब्बल्ली से गिरफ्तार किया गया। उस पर ₹14.7 लाख की ठगी का आरोप है। मीरामार की एक महिला ने शिकायत दी थी कि आरोपी ने खुद को TRAI और सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर आधार के दुरुपयोग का झूठा आरोप लगाया, “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी और ₹14.7 लाख की वसूली कर ली।
पुलिस की अपील
अधिकारियों का कहना है कि त्वरित शिकायत, तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग समन्वय से साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या निवेश प्रस्ताव से सावधान रहें और ठगी की आशंका होते ही तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें। गोवा में घटते आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि सख्ती और जागरूकता साथ-साथ चलें तो साइबर अपराधियों की कमर तोड़ी जा सकती है।
