पटना साइबर ठगी: जामताड़ा गिरोह पकड़ा

जामताड़ा मॉडल का नया खुलासा: पटना में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 20 राज्यों में फैला था नेटवर्क

Team The420
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बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस ने जामताड़ा मॉडल पर चल रहे एक अंतरराज्यीय ठगी गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो महानगर गैस कनेक्शन देने या डिस्कनेक्शन की धमकी देकर लोगों को निशाना बनाते थे। गिरोह पर देश के करीब 20 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के जामताड़ा जिले के निवासी गुल्टन यादव, अरुण मंडल और पंकज कुमार तथा महाराष्ट्र के पुणे निवासी गिरोह सरगना श्रीधर के रूप में हुई है। आरोपी पिछले पांच से छह महीने से पटना के न्यू जगनपुरा इलाके में किराए के फ्लैट से ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लोगों को फोन कर महानगर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने का झांसा देता था। कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन डिस्कनेक्ट करने की धमकी भी दी जाती थी। इसके बाद पीड़ितों को एक संदिग्ध APK फाइल भेजी जाती थी। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल करते थे, साइबर अपराधी बैंक खाते और मोबाइल से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके बाद खाते से पैसे ट्रांसफर कर लिए जाते थे।

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पुलिस ने बताया कि तकनीकी जांच में पता चला है कि इस गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत लगभग 20 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। अनुमान है कि गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।

जांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह टेलीग्राम के जरिए लोगों का डेटा हासिल करता था। उन्हें मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी, जिसके आधार पर पीड़ितों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस अब उन मुख्य मास्टरमाइंड की भी तलाश कर रही है, जो इस गिरोह को डेटा सप्लाई कर रहे थे।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से 18 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले चार से पांच वर्षों से साइबर अपराध में सक्रिय हैं और पहले भी जेल जा चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने फिर से ठगी का संगठित नेटवर्क खड़ा कर लिया।

साइबर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले में फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। बरामद मोबाइल फोन और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसके साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क स्थापित किया गया है ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से बदलाव आ रहा है और अपराधी नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए लोगों को अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक और APK फाइल डाउनलोड करने से बचना चाहिए। किसी भी कंपनी या सेवा के नाम पर आने वाले ऑफर की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि करना जरूरी है।

पुलिस ने कहा है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और डेटा सप्लाई करने वाले नेटवर्क की पहचान के लिए जांच जारी है। साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए देशभर की एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है।

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