ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की गतिविधियों पर इजरायल की खुफिया एजेंसियों की निगरानी को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि इजरायल की टीम लंबे समय तक उनकी डिजिटल और भौतिक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जुड़े सुरक्षा नेटवर्क ने कथित तौर पर तेहरान के कुछ निगरानी सिस्टम को निशाना बनाया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रैफिक कैमरों पर हैकिंग दावा
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया टीम पर आरोप है कि उसने तेहरान के कुछ ट्रैफिक निगरानी कैमरों को हैक कर शहर की आवाजाही व्यवस्था से जुड़े डेटा तक पहुंच बनाई। दावा किया गया है कि इन कैमरों के माध्यम से महत्वपूर्ण स्थानों की गतिविधियों पर नजर रखने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सैन्य और खुफिया अभियानों में साइबर तकनीक का उपयोग बढ़ा है, लेकिन ऐसे दावों की आधिकारिक पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती।
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मोबाइल नेटवर्क की निगरानी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खुफिया ऑपरेशन के दौरान मोबाइल संचार नेटवर्क को भी कथित तौर पर मॉनिटर किया गया। आरोप है कि सुरक्षा टीम ने कुछ क्षेत्रों के टेलीफोन और इंटरनेट ट्रैफिक से जुड़ा डेटा हासिल करने की कोशिश की, जिससे कमांडो और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की जा सके। हालांकि, किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने इस तरह के साइबर अभियान की पुष्टि नहीं की है।
साइबर युद्ध का बढ़ता खतरा
जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में साइबर युद्ध की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जहां देशों की खुफिया एजेंसियां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देख रही हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे अभियानों में अक्सर वास्तविक और अनुमानित जानकारी के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि कई रिपोर्टें गोपनीय स्रोतों पर आधारित होती हैं।
ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है और दोनों देशों पर एक-दूसरे के खिलाफ साइबर और खुफिया गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक संघर्षों में पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ साइबर स्पेस भी एक महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्र बन चुका है, जहां सूचना, डेटा और संचार नेटवर्क को लक्षित किया जाता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खुफिया टीमों ने कुछ समय तक तेहरान के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर लगे कैमरा नेटवर्क से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, जिससे सुरक्षा संरचना की गतिविधियों को समझने की कोशिश की गई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी की गई, जिससे सुरक्षा बलों की संभावित गतिविधियों का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया।
हालांकि, इजरायल सरकार या खुफिया एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसी तरह ईरान की ओर से भी इस रिपोर्ट पर विस्तृत टिप्पणी नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर सुरक्षा के युग में ऐसी खबरों को सावधानी से देखने की जरूरत होती है क्योंकि कई बार तकनीकी युद्ध से जुड़ी जानकारी गोपनीय रहती है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण साइबर निगरानी और डिजिटल खुफिया ऑपरेशन आने वाले समय में और अधिक जटिल हो सकते हैं। यदि रिपोर्ट के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति और साइबर युद्ध नीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
