Operation Epic Fury: US साइबर हमले ईरान पर।

अमेरिका-ईरान साइबर जंग की नई रणनीति: साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं से सैन्य दबाव बढ़ाने की तैयारी

Team The420
5 Min Read

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सैन्य रणनीति का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि United States और Iran के बीच चल रहे संघर्ष में साइबर और अंतरिक्ष आधारित युद्ध क्षमताओं को प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अभियान Operation Epic Fury के तहत गैर-घातक डिजिटल प्रभाव पैदा करने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे ईरान की संचार, निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को कमजोर किया जा सके।

जनरल डैन केन की ब्रीफिंग

अमेरिकी संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि प्रारंभिक चरण में साइबर और अंतरिक्ष कमांड को “पहले मूवर” के रूप में तैनात किया गया है। उनका कहना था कि United States Cyber Command और अंतरिक्ष आधारित रक्षा इकाइयां दुश्मन की संचार प्रणाली को बाधित करने, खुफिया संग्रह बढ़ाने और रणनीतिक दबाव बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हालांकि अभियान के तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program

साइबर अभियान की रणनीति

पूर्व सैन्य साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान में दीर्घकालिक ऑपरेशन मॉडल अपनाया जा सकता है। उनका कहना है कि साइबर युद्ध में प्रभाव पैदा करने के लिए पहले नेटवर्क सिस्टम में गहराई तक प्रवेश करना जरूरी होता है। कई मामलों में ऐसी पहुंच हासिल करने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता है और इसे लगातार बनाए रखना पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार नेटवर्क में प्रवेश मिलने के बाद ऑपरेटरों के सामने दो विकल्प होते हैं—खुफिया जानकारी जुटाना या सिस्टम को निष्क्रिय करना। सिस्टम को पूरी तरह बाधित करने पर उस स्रोत से भविष्य में खुफिया जानकारी प्राप्त करने की संभावना खत्म हो जाती है, इसलिए कई अभियानों में खुफिया संग्रह को प्राथमिकता दी जाती है।

24×7 निगरानी और जोखिम

अमेरिकी रणनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान अभियान में साइबर ऑपरेटर 24 घंटे निगरानी और लक्ष्य विश्लेषण पर काम कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य केवल तत्काल सैन्य प्रभाव पैदा करना नहीं बल्कि विरोधी पक्ष की योजना, नेतृत्व गतिविधि और संभावित जवाबी रणनीति का आकलन करना भी है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व के संभावित ठिकानों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विशेषज्ञों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यूक्रेन संघर्ष के दौरान कुछ साइबर हमलों ने अस्थायी संचार व्यवधान पैदा किया था, लेकिन बाद में विरोधी पक्ष ने अधिक उन्नत और सुरक्षित संचार तकनीकों को अपनाना शुरू कर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि साइबर हमले कभी-कभी रणनीतिक दृष्टि से उल्टा असर भी पैदा कर सकते हैं क्योंकि वे विरोधी को तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

सैन्य सलाहकारों का कहना है कि दीर्घकालिक अभियान में साइबर क्षमताओं का मुख्य उपयोग खुफिया संग्रह और लक्ष्य मूल्यांकन के लिए किया जा सकता है, जबकि सीधे विनाशकारी प्रभाव पैदा करने वाले साइबर हमलों का उपयोग सीमित परिस्थितियों में ही होगा। विशेष रूप से सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाने में सावधानी बरती जा रही है क्योंकि ऐसे प्रभाव को बाद में उलटना संभव होता है।

भविष्य की संभावनाएं

कुछ पूर्व कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि अगर ईरान में राजनीतिक अस्थिरता या लोकप्रिय विरोध आंदोलन उभरता है तो साइबर ऑपरेशन का उपयोग संचार सहायता या रणनीतिक सूचना प्रसार के लिए किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में बिजली या दूरसंचार नेटवर्क को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने की संभावना भी चर्चा में है।

पेंटागन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन के कई चरण हो सकते हैं और हर चरण के अनुसार साइबर मिशन की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। यदि आवश्यक हुआ तो साइबर और पारंपरिक सैन्य शक्ति के संयोजन से लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जाएगी।

कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शा रहा है, जहां सैन्य शक्ति के साथ-साथ डिजिटल खुफिया, नेटवर्क नियंत्रण और सूचना युद्ध भी संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के हाइब्रिड युद्ध अभियानों की भूमिका और अधिक बढ़ सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article