शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश धोखाधड़ी मामले की जांच अब उन लोगों तक भी पहुंच सकती है, जिन्होंने कथित तौर पर ठगी की रकम छिपाने या उसका उपयोग करने में मदद की। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 80 एफआईआर की जांच में यह संकेत मिला है कि नसीम के नेटवर्क में शामिल कई लोगों ने निवेशकों से जुटाई गई राशि को अलग-अलग माध्यमों से नियंत्रित करने की कोशिश की। बैंक रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयान के आधार पर नए संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस ठगी प्रकरण में केवल कंपनी के प्रमोटर ही नहीं, बल्कि बिचौलियों, एजेंटों और कुछ जमीन कारोबारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। आरोप है कि लुभावनी जमीन निवेश योजनाओं के जरिए हजारों लोगों से अरबों रुपये वसूले गए और बाद में रकम को अलग-अलग कारोबार में लगाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग आर्थिक लाभ लेकर तेजी से संपत्ति अर्जित करने में सफल रहे।
सूत्रों के अनुसार, राशिद नसीम से पूछताछ के दौरान उसके करीबी सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई अन्य नाम सामने आ सकते हैं। लखनऊ जेल में बंद कंपनी के स्थानीय निदेशक अमिताभ श्रीवास्तव, उनकी पत्नी मीरा श्रीवास्तव और कुछ जमीन कारोबारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक संदिग्ध के खिलाफ दर्ज दर्जनों एफआईआर का अध्ययन किया जा रहा है।
बताया गया है कि कंपनी के प्रचार और एजेंट नेटवर्क के माध्यम से निवेशकों को कार उपहार, ऊंचे मुनाफे और जमीन बुकिंग जैसी योजनाओं का लालच दिया जाता था। कई मामलों में आरोप है कि एजेंटों को मोटी रकम देकर प्रचार कराया गया और बाद में निवेशकों का पैसा परियोजनाओं में लगाने के बजाय अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया।
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जांच में यह भी सामने आया है कि 2017 के आसपास राशिद नसीम नेपाल में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन बाद में जमानत और पैरवी से जुड़े विवाद भी चर्चा में रहे। उस समय शाइन सिटी के कई प्रोजेक्टों में ठगी की शिकायतें बढ़ने लगी थीं और पूर्वांचल क्षेत्र में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी थी। वाराणसी, लखनऊ, आजमगढ़ और आसपास के जिलों में एजेंट नेटवर्क सक्रिय बताया गया था।
ईडी अधिकारियों के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच आगे बढ़ाने की तैयारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि निवेशकों से वसूली गई रकम किन बैंक खातों में गई और किन लोगों ने अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा उठाया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कुछ सफेदपोश व्यक्तियों और कॉलोनाइजरों ने इस धन का उपयोग जमीन और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में आर्थिक अपराध की परतें काफी जटिल हैं और इसमें संगठित ठगी नेटवर्क की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। एजेंसियों का मानना है कि यदि पूछताछ में सहयोगियों के नाम सामने आते हैं तो गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। पीड़ित निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए बैंक खातों की गहन पड़ताल की जा रही है और ठगी की रकम की रिकवरी की संभावनाओं का भी आकलन किया जा रहा है।
