भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार शाम शिक्षा विभाग के एक सहायक अभियंता को पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई शहर के डाकबंगला रोड स्थित शिक्षा विभाग के मुख्य द्वार के समीप की गई, जहां पहले से जाल बिछाकर टीम तैनात थी।
गिरफ्तार अभियंता की पहचान रोशन कुमार के रूप में हुई है। बताया जाता है कि वे मूल रूप से लखीसराय जिले के निवासी हैं और वर्तमान में शिक्षा विभाग में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें विभागीय कार्यालय ले जाया गया, जहां देर रात तक दस्तावेजों की जांच होती रही। इस दौरान कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया गया और अंदर केवल अधिकृत अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
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शिकायत और कमीशन मांग
मामले की शुरुआत नौतन प्रखंड के रहीमपुर निवासी संवेदक शम्स तबरेज की शिकायत से हुई। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में मरम्मत और निर्माण संबंधी कार्य कराया था। इन कार्यों के एवज में उन्हें लगभग 57 लाख रुपये का भुगतान होना था। आरोप है कि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सहायक अभियंता ने कुल राशि का दस प्रतिशत कमीशन मांगा।
संवेदक का कहना था कि कई बार बिल पास कराने का अनुरोध करने के बावजूद बिना कमीशन दिए फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। लगातार दबाव और मांग से परेशान होकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एक विशेष टीम गठित की गई और पूरे मामले की योजना बनाकर कार्रवाई की गई।
ट्रैप ऑपरेशन
पूर्व निर्धारित योजना के तहत संवेदक को पांच लाख रुपये की राशि लेकर अभियंता के पास भेजा गया। जैसे ही अभियंता ने राशि स्वीकार की, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान कथित रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी देर शाम तक कार्यालय में मौजूद रहे और अभिलेखों की समीक्षा की जाती रही। सूत्रों के अनुसार, भुगतान से संबंधित अन्य फाइलों की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग में भुगतान को लेकर लंबे समय से शिकायतें आती रही हैं। हालांकि अधिकारी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत प्रवीण के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई हुई थी। उस घटना के बाद विभागीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाने की बात कही गई थी। बावजूद इसके, हालिया गिरफ्तारी से संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति पूरी तरह थमी नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सहायक अभियंता के खिलाफ विधि सम्मत धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और संबंधित अभिलेखों को जब्त कर लिया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
