क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन में निवेश कर कम समय में दोगुना मुनाफा दिलाने का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। रामगढ़ताल क्षेत्र में एक होटल के कमरे से संचालित इस नेटवर्क के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर गिरोह के विस्तार की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी सेमिनार आयोजित कर निवेशकों को भरोसे में लेते थे और मोटी रकम जुटाकर ठिकाना बदल देते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवरिया जिले के खामपार बहोरवा निवासी संजीव कुमार कुशवाहा और गौरीबाजार बन्सहिया निवासी अंकित श्रीवास्तव के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने संगठित तरीके से निवेशकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर धन इकट्ठा किया। कमरे से एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनकी डिजिटल जांच कर लेन-देन और संभावित खातों की पड़ताल की जा रही है।
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सूत्रों के मुताबिक, सूचना मिली थी कि शहर के एक प्रमुख होटल के कमरा संख्या 315 में कुछ लोग बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर “गारंटीड डबल रिटर्न” का दावा कर रहे हैं। टीम ने मौके पर पहुंचकर कमरे की तलाशी ली तो वहां निवेश संबंधी प्रेजेंटेशन चल रहा था। सफेद शर्ट पहने संजीव कुमार कुशवाहा उपस्थित लोगों को स्कीम समझा रहा था, जबकि अंकित श्रीवास्तव निवेशकों को जोड़ने और संपर्क साधने का काम कर रहा था।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संभावित निवेशकों से संपर्क करते थे। पहले उन्हें ऑनलाइन वेबिनार और ऑफलाइन सेमिनार में बुलाया जाता, जहां क्रिप्टो बाजार के ऊंचे रिटर्न के उदाहरण देकर भरोसा बनाया जाता था। इसके बाद न्यूनतम निवेश राशि तय कर खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती। निवेशकों को शुरुआती चरण में छोटे भुगतान कर भरोसा बढ़ाया जाता, फिर बड़ी रकम जुटाकर आरोपी गायब हो जाते थे।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरोपियों के पास किसी प्रकार का वैध पंजीकरण, लाइसेंस या अधिकृत निवेश परामर्श से जुड़ा दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। न ही वे किसी मान्यता प्राप्त एक्सचेंज या नियामकीय ढांचे से संबद्ध होने का प्रमाण दे सके। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में निवेशकों की सूची, ट्रांजेक्शन डिटेल और प्रचार सामग्री होने की आशंका है, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
मौके से बैकुंठपुर (गोपालगंज, बिहार) निवासी मनोज दीक्षित और सीधारी पूर्वी, आजमगढ़ निवासी श्रवण कुमार को भी हिरासत में लेकर बयान दर्ज किए गए हैं। इनके जरिए गिरोह के अन्य सहयोगियों और संभावित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क देवरिया और आसपास के जिलों तक फैला हो सकता है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कई निवेशकों से लाखों रुपये की वसूली की गई है। कुछ पीड़ितों ने बड़ी राशि गंवाने की आशंका जताई है, हालांकि कुल ठगी की रकम का आधिकारिक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। डिजिटल लेन-देन के ट्रेल और बैंक खातों की जांच के आधार पर धन की रिकवरी और अन्य संलिप्त खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो निवेश के नाम पर “गारंटीड” या “डबल रिटर्न” का दावा अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है। निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की वैधता, पंजीकरण और नियामकीय स्थिति की जांच जरूरी है। अज्ञात सेमिनार, व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया प्रचार के आधार पर रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।
फिलहाल दोनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। अन्य सहयोगियों की तलाश में दबिश जारी है और पीड़ितों से आगे आने की अपील की गई है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा कर ठगी की रकम की भरपाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।
