मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में पुलिस ने हनी ट्रैप के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने प्रॉपर्टी डीलर को प्रॉपर्टी दिखाने के बहाने बुलाकर उसकी आपत्तिजनक वीडियो बना ली और बाद में रेप केस में फंसाने की धमकी देकर तीन लाख रुपये की मांग की। दबाव बनाकर 60 हजार रुपये वसूल भी लिए गए।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह योजनाबद्ध तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। इस पूरे नेटवर्क में सीबा उर्फ शानिया की भूमिका मुख्य बताई जा रही है। वह सोशल मीडिया और मोबाइल कॉल के जरिए लोगों से संपर्क साधती थी और धीरे-धीरे जान-पहचान बढ़ाकर उन्हें मिलने के लिए बुलाती थी।
एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि रामगंगा विहार फेज-1 निवासी विकास मेहरा प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। उनकी पत्नी सुचिता मेहता ने सिविल लाइंस थाने में तीन महिलाओं और तीन पुरुषों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। तहरीर में बताया गया कि नवंबर 2025 में सीबा उर्फ शानिया ने विकास मेहरा से फोन पर संपर्क किया और बातचीत शुरू की। कुछ समय बाद दोनों के बीच परिचय बढ़ गया।
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24 फरवरी की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे आरोपी महिला ने प्रॉपर्टी दिखाने के बहाने विकास को जिगर कॉलोनी बुलाया। वहां से चाबी लेने की बात कहकर वह उन्हें चक्कर की मिलक स्थित एक दो मंजिला मकान पर ले गई। पुलिस के अनुसार, मकान में पहले से दो-तीन लोग मौजूद थे। कमरे में महिला ने आपत्तिजनक स्थिति बनाई और उसी दौरान अन्य साथियों ने वीडियो और फोटो बना लिए।
इसके बाद आरोपियों ने विकास को वीडियो वायरल करने और रेप केस में फंसाने की धमकी दी। तीन लाख रुपये की मांग की गई। धमकियों से घबराकर पीड़ित से 60 हजार रुपये ले लिए गए। बाद में पीड़ित ने घटना की जानकारी अपनी पत्नी को दी, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सिविल लाइंस थाना पुलिस ने जांच शुरू की। रविवार सुबह एसएचओ मनीष सक्सेना, एसएसआई हरेंद्र सिंह, एसआई मदन कुमार, अनुज चौधरी और संजय सिंह की टीम ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में चक्कर की मिलक निवासी सीबा उर्फ शानिया, जावेद, उसकी पत्नी निशा उर्फ ईशा, वसीम, पुराना आरटीओ क्षेत्र निवासी मुस्कान और बिलारी थाना क्षेत्र के गांव तेवर खास निवासी अमान उर्फ अमन शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह संगठित ढंग से काम करता था। मुख्य आरोपी पहले सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित करती थी, फिर भरोसा जीतकर मिलने का बहाना बनाती थी। कमरे में बुलाकर आपत्तिजनक स्थिति तैयार की जाती और छिपे तौर पर वीडियो रिकॉर्ड कर लिया जाता था। इसके बाद ब्लैकमेल कर मोटी रकम की मांग की जाती थी।
सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने पहले कितने लोगों को इसी तरह निशाना बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई अन्य पीड़ित सामने आता है तो उसकी शिकायत पर भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
