यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर एक बड़े संगठित फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसमें 45 लोगों से करीब ₹6.82 करोड़ की ठगी की गई। आरोप है कि BFX Pro नामक कंपनी के डायरेक्टरों और उनके सहयोगियों ने निवेशकों को ऊंचे रिटर्न और विदेश यात्राओं का लालच देकर इस जाल में फंसाया। जब पीड़ितों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें धमकियां तक दी गईं।
शिकायत के आधार पर दर्ज मामलों में आरोपियों के रूप में प्रियाशु दत्ता, रमेश दत्ता, संदीप दत्ता, दीक्षा दत्ता, अमित खेड़ा, हेमंत भटनागर, हरनेक सिंह और विनय गुप्ता के नाम सामने आए हैं। इन पर पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामलों में केस दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है और डिजिटल ट्रांजेक्शन व बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है।
पीड़ित अश्वनी कुमार के अनुसार, आरोपियों ने खुद को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिप्टो निवेश कंपनी से जुड़ा बताया और दावा किया कि उनकी कंपनी विदेशी बाजारों में काम करती है। निवेश करने पर हर महीने 8 से 10 प्रतिशत तक रिटर्न देने का भरोसा दिया गया। साथ ही कंपनी को सरकारी रूप से पंजीकृत और विशेषज्ञों द्वारा संचालित बताया गया, जिससे लोगों का विश्वास बढ़ा।
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विश्वास में आकर कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश कर दी। कुछ ने आभूषण बेचे, बैंक से लोन लिया, रिश्तेदारों से उधार लिया और यहां तक कि संपत्ति बेचकर भी पैसा लगाया। एक पीड़ित ने अकेले करीब ₹4.16 करोड़ तक निवेश कर दिया। निवेश के बाद उन्हें ‘Meta BFX Pro’ नाम की एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड कराई गई, जिसमें एक यूजर आईडी देकर उनके निवेश और मुनाफे को दिखाया जाता था।
जांच में सामने आया है कि यह पूरा डिजिटल सिस्टम केवल भ्रम पैदा करने के लिए बनाया गया था। शुरुआत में निवेशकों को फर्जी मुनाफा दिखाकर उन्हें और निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही आरोपियों ने विदेश यात्राओं का लालच भी दिया। दिसंबर 2024 में बैंकॉक, जनवरी 2025 में दुबई और बाद में जिम कॉर्बेट जैसे टूर आयोजित कर लोगों का भरोसा और मजबूत किया गया।
इतना ही नहीं, जीरकपुर, कसौली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में बड़े स्तर पर मीटिंग्स आयोजित कर नए निवेशकों को जोड़ा गया। इन मीटिंग्स में कंपनी की ‘सफलता’ और ‘ग्लोबल पहुंच’ का प्रचार किया गया, जिससे लोग बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित हुए। एक चरण में निवेशकों को कहा गया कि वे अपने रिटर्न को चार महीने के लिए लॉक करें, ताकि उन्हें ज्यादा लाभ मिल सके। इसी दौरान पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई।
कुछ समय बाद अचानक निवेशकों की आईडी बंद हो गई और पैसा वापस मिलना बंद हो गया। जब लोगों ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, तो न तो कोई जवाब मिला और न ही ऑफिस सक्रिय पाया गया। इसके बाद ही पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने शिकायत दर्ज कराई।
मामले में यह भी सामने आया है कि इसी तरीके से अन्य 44 लोगों से करीब ₹2.66 करोड़ की ठगी की गई। इस तरह कुल ठगी का आंकड़ा ₹6.82 करोड़ तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन अन्य राज्यों या देशों से जुड़े हो सकते हैं।
