साइबर क्राइम विंग की बड़ी कार्रवाई, रिलीज से पहले HD कॉपी लीक होने पर डिजिटल पायरेसी नेटवर्क का भंडाफोड़

तमिलनाडु में विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के ऑनलाइन लीक मामले में 6 गिरफ्तार; 300 से ज्यादा पाइरेसी लिंक ब्लॉक

Roopa
By Roopa
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चेन्नई: तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म “जन नायकन” के रिलीज से पहले हाई-डेफिनिशन (HD) संस्करण के अवैध ऑनलाइन लीक मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इस लीक के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भारी आक्रोश फैल गया और साइबर स्तर पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब फिल्म की पायरेटेड कॉपी अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैलने की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही राज्य साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन सेंटर ने केस दर्ज कर तुरंत जांच शुरू की और लीक के पीछे मौजूद नेटवर्क को ट्रेस करने के लिए कई विशेष टीमें गठित की गईं।

फिल्म “जन नायकन”, जिसका निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और निर्माण KVN प्रोडक्शंस ने किया है, विजय की कथित तौर पर आखिरी फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद उनके पूर्णकालिक राजनीति में प्रवेश करने की चर्चा है। इसी वजह से इस फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह था और लीक को बड़ा झटका माना जा रहा है।

जांचकर्ताओं ने बताया कि फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज से कुछ दिन पहले ही ऑनलाइन अपलोड कर दी गई थी और देखते ही देखते यह कई क्लाउड स्टोरेज प्लेटफॉर्म्स और फाइल-शेयरिंग लिंक के जरिए तेजी से फैल गई। इस घटना से प्रोडक्शन हाउस और वितरकों को आर्थिक और प्रतिष्ठा दोनों स्तर पर नुकसान की आशंका जताई गई है।

शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की। क्लाउड अपलोड, शेयरिंग पैटर्न और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि लीक सबसे पहले कहां से हुआ।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि 12 अप्रैल को तकनीकी निगरानी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर छह लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि ये सभी लोग फिल्म की पायरेटेड कॉपी को अपलोड करने, शेयर करने और अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाने में शामिल थे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से जुड़े डिजिटल डिवाइस, स्टोरेज और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह एक संगठित पायरेसी नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जो क्लाउड स्टोरेज और ड्राइव लिंक के जरिए तेजी से कंटेंट फैलाने में सक्षम था।

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साइबर क्राइम विंग ने इस पूरे मामले में 300 से अधिक अवैध लिंक को ब्लॉक करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। अधिकारियों ने बताया कि कई लिंक बार-बार री-अपलोड होकर अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे थे, जिससे उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण हो रहा था।

यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, कॉपीराइट अधिनियम और सिनेमैटोग्राफी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जो डिजिटल पायरेसी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आधार प्रदान करता है।

जांचकर्ता पूरे वितरण नेटवर्क को मैप करने के लिए गहन डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं—जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि पहली बार अपलोड कहां हुआ और बाद में इसे किन-किन चैनलों से फैलाया गया।

साइबर अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं फिल्म उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं और थिएटर रिलीज के प्रभाव को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने बताया कि पायरेसी नेटवर्क अब पहले से ज्यादा तकनीकी रूप से उन्नत हो गए हैं और अक्सर एन्क्रिप्टेड चैनलों और गुमनाम अकाउंट्स का उपयोग करते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने कहा कि रिलीज से पहले इस तरह का लीक फिल्म की ओपनिंग पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब दर्शकों में पहले से ही इसे लेकर भारी उत्साह हो।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगे भी अवैध लिंक और वितरण चैनलों पर नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस पायरेसी नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

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