वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पेंशन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने शिक्षा विभाग के पांच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर पेंशन संबंधी लाभ प्राप्त किए और सरकारी धन का अनुचित तरीके से उपयोग किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे पेंशन भुगतान तंत्र और संभावित अन्य लाभार्थियों की भी जांच की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी 22 जुलाई को चलाए गए विशेष अपराध निरोधक अभियान के दौरान की गई। कोतवाली थाना क्षेत्र में नियमित चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस टीम ने लंका बस स्टैंड के पास पांचों आरोपियों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 72 वर्षीय घूमा सिंह यादव, 71 वर्षीय बनवारी सिंह यादव, 67 वर्षीय पतिराज राम, 66 वर्षीय डुबरी सिंह यादव और 66 वर्षीय राम अवध सिंह यादव के रूप में हुई है। सभी आरोपी शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन सभी की भूमिका पेंशन से जुड़े कथित अनियमित वित्तीय लेनदेन में सामने आई है।
मामले में कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित धोखाधड़ी किस अवधि तक चलती रही, कितनी राशि का गलत तरीके से भुगतान हुआ और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पेंशन भुगतान से संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों, सेवा अभिलेखों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जा रही है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से रिकॉर्ड भी तलब किए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितता प्रशासनिक स्तर पर हुई या सुनियोजित तरीके से सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया।
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पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पेंशन स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया के दौरान कहीं फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी या अन्य किसी प्रकार की कूटरचना का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो मामले में अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं और अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
वित्तीय रिकॉर्ड के विश्लेषण के लिए संबंधित बैंकिंग दस्तावेजों और भुगतान विवरण की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता से वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक परीक्षण भी कराया जा सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना प्राथमिकता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा फर्जीवाड़े के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यदि अन्य संदिग्ध खातों या लाभार्थियों की जानकारी मिलती है, तो उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
प्रारंभिक जांच के बाद गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे भेजा गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और दस्तावेजी साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड तथा पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क, विभागीय मिलीभगत या अतिरिक्त वित्तीय अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा और विस्तृत किया जाएगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है ताकि कथित पेंशन धोखाधड़ी से जुड़े पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जा सके।
