एक अध्ययन में दावा किया गया है कि Amazon और Walmart के AI शॉपिंग असिस्टेंट गलत ‘Made in USA’ दावों की पहचान कर सकते हैं।

AI ने पकड़ी ‘Made in USA’ लेबलिंग में गड़बड़ी, लेकिन कार्रवाई नहीं: Amazon और Walmart पर अध्ययन में उठे सवाल

Team The420
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वॉशिंगटन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शॉपिंग असिस्टेंट उपभोक्ताओं को सही उत्पाद चुनने में मदद करने के लिए तेजी से इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन एक नए अध्ययन ने इनके इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अध्ययन में दावा किया गया है कि Amazon और Walmart के AI शॉपिंग असिस्टेंट उत्पादों पर किए गए गलत “Made in USA” दावों की पहचान करने में सक्षम हैं, फिर भी कंपनियां कथित रूप से इस तकनीक का उपयोग ऐसे भ्रामक दावों पर कार्रवाई करने के लिए नहीं कर रही हैं।

यह अध्ययन अमेरिका की पूर्व फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) प्रमुख लीना खान के नेतृत्व वाले एक थिंक टैंक द्वारा जारी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, Amazon का Alexa for Shopping और Walmart का Sparky उत्पाद विवरण में मौजूद विरोधाभासी सूचनाओं के आधार पर यह पहचान सकते हैं कि किसी उत्पाद पर “Made in USA” का दावा संदिग्ध या गलत हो सकता है। इसके बावजूद इन संदिग्ध लिस्टिंग को स्वतः चिह्नित करने या हटाने की व्यवस्था सक्रिय रूप से लागू नहीं की गई है।

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अध्ययन के शोधकर्ताओं ने AI चैटबॉट्स से यह भी पूछा कि कंपनियां ऐसे मामलों में अधिक सख्ती क्यों नहीं दिखातीं। रिपोर्ट के मुताबिक, Walmart के AI असिस्टेंट ने जवाब दिया कि “Made in USA” नियमों का प्रवर्तन सामान्यतः निर्माताओं के खिलाफ किया जाता है, खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ नहीं। हालांकि अध्ययन में इस जवाब को कानूनी आधार के बजाय व्यावसायिक दृष्टिकोण बताया गया है।

Amazon ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जहां भी उपलब्ध होता है, उत्पादों के विवरण पृष्ठ पर उनके मूल देश की जानकारी दिखाई जाती है और कंपनी ग्राहकों के लिए इस जानकारी को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वहीं, रिपोर्ट प्रकाशित होने तक Walmart की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

यह अध्ययन कोलंबिया लॉ स्कूल के Center for Law and the Economy द्वारा प्रकाशित पहली रिपोर्ट है। इस केंद्र की स्थापना लीना खान के FTC कार्यकाल समाप्त होने के बाद की गई थी। अध्ययन में कहा गया है कि AI तकनीक लगातार अधिक सक्षम और परिष्कृत होती जा रही है, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग कंपनियों की कारोबारी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसी गलत उत्पाद दावे से कंपनी पर प्रत्यक्ष वित्तीय, नियामकीय या प्रतिष्ठा संबंधी दबाव नहीं पड़ता, तो ऐसे मामलों में कार्रवाई की संभावना कम हो सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, Amazon के AI असिस्टेंट ने भी पूछे जाने पर संकेत दिया कि अमेरिकी निर्माताओं को होने वाला नुकसान वास्तविक है, लेकिन जब तक उससे कंपनी पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता, तब तक कार्रवाई की प्रेरणा सीमित रहती है।

अमेरिकी FTC के नियमों के अनुसार किसी उत्पाद को “Made in USA” तभी कहा जा सकता है, जब वह पूरी तरह या लगभग पूरी तरह अमेरिका में निर्मित हो। पिछले वर्ष FTC ने Amazon और Walmart दोनों को तीसरे पक्ष के विक्रेताओं द्वारा किए जा रहे ऐसे दावों पर अधिक प्रभावी निगरानी रखने और भ्रामक लेबलिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था। दोनों कंपनियों की नीतियों में भी विक्रेताओं के लिए उत्पाद संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य बताया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI की बढ़ती क्षमता के बावजूद केवल तकनीक पर्याप्त नहीं है। यदि कंपनियां उपभोक्ता संरक्षण और नियामकीय अनुपालन को प्राथमिकता नहीं देंगी, तो AI संभावित अनियमितताओं की पहचान करने के बावजूद उनका समाधान नहीं कर पाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में AI के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए नियामक संस्थाओं की सक्रिय भूमिका और स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी।

अध्ययन ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहक अनुभव बेहतर बनाने, खरीदारी को अधिक व्यक्तिगत बनाने और बिक्री बढ़ाने के लिए AI आधारित टूल्स पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। रिपोर्ट ने यह बहस भी तेज कर दी है कि क्या AI का उपयोग केवल व्यावसायिक लाभ बढ़ाने तक सीमित रहेगा या उसे उपभोक्ता हितों की रक्षा और ऑनलाइन बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी समान रूप से प्रभावी बनाया जाएगा।

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